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श्री विरांची शाह, उपाध्यक्ष, आईडीएमए जीएसबी

किसी भी उत्पाद का विपणन गुणवत्ता का काम होता है क्योंकि किसी उत्पाद की गुणवत्ता बिक्री को परिभाषित करने और उसका प्रबंधन करने में मदद करती है। उत्पाद के प्रकार और रोगी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कारण फार्मा उद्योग में गुणवत्ता की विशेष स्थिति होती है। इसलिए, इस क्षेत्र में डॉक्यूमेंटेशन, डब्ल्यूएचओ जैसे निकायों से प्रमाणपत्र और प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं एवं केन्द्रों से जांच सुविधाएं महत्वपूर्ण होती हैं।

भारतीय फार्मास्यूटिकल्स उद्योग, लगभग 300 बड़ी और 10,000 से अधिक छोटी एवं लघु उद्योग की फार्मा इकाईयों के साथ, विविध रूप से बंटा हुआ है। मध्यम, छोटे एवं लघु उद्योग, बड़ी भारतीय और विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिए आपूर्ति श्रृंखला का अत्यावश्यक हिस्सा हैं। मध्यम, छोटे एवं लघु उद्योग शेष विश्व के बाज़ारों और निविदाओं में आपूर्ति करने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। फार्मा उद्योग के लिए गुजरात एक महत्वपूर्ण राज्य है। यह फार्मा निर्यात में 28% और घरेलू बाज़ार में 40% का योगदान देता है। गुजरात में दवा विफलता अनुपात 6.4 है, जबकि इसकी तुलना में भारत के अन्य राज्यों में यह 9.5 है।

मध्यम, छोटे एवं लघु उद्योगों के समक्ष चुनौतियां

  • प्रणाली को नवीनीकृत करने की उच्च लागत जो कि मध्यम, छोटे एवं लघु उद्योगों की पहुंच से बाहर होती है
  • कड़ी गुणवत्ता प्रबंधन कार्यप्रणाली (जीएमपी)
  • बढ़ते हुए मानव संसाधन और ऊर्जा लागत
  • नए बाज़ार तक सीमित पहुंच

मध्यम, छोटे एवं लघु उद्योगों के लिए विपणन प्रचार के दो तरीके हैं। वे हैं:

  • भारत सरकार की योजनाएं
  • स्थानीय उद्योग संघ से समर्थन

अ. भारत सरकार की योजनाएं

मध्यम, छोटे एवं लघु उद्योगों के लाभों के लिए राज्य एवं केन्द्र सरकार दोनों के पास कई योजनाएं हैं। इनमें से कुछ हैं

  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग योजना लघु, छोटे एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की: इस योजना के अनुसार, मध्यम, छोटी एवं लघु औद्योगिक इकाई को भाग लेने के लिए समर्थन दिया जाएगा
    • विदेशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी/व्यापार मेले/क्रेता—विक्रेता सम्मेलन में भागीदारी
    • भारत में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भागीदारी
    • भारत में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन/सेमिनार का आयोजन
  • डीसी—एमएसएमई द्वारा एमएसएमई—एमडीए (विपणन विकास सहायता):
    • अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी/मेलों में भागीदारी
    • बार—कोडिंग में वैश्विक मानक (जीएस1) प्रयोग करने के लिए वित्तीय सहायता
    • सरकार की खरीद और प्राथमिकता मूल्य नीति
  • डीसीएमएसएमई (एनएमसीपी) द्वारा विपणन सहायता और प्रौद्योगिकी नवीनीकरण
    • पैकेजिंग में प्रौद्योगिकी नवीनीकरण
    • आधुनिक विपणन तकनीकों के लिए कुशलता नवीनीकरण/विकास
    • प्रतिस्पर्धी अध्ययन
    • उत्तर—पूर्वी क्षेत्र के लिए विशेष अंश
    • राज्य/ज़िला स्तर की स्थानीय प्रदर्शनी/व्यापार मेले के माध्यम से नए बाज़ार
    • कॉर्पोरेट प्रशासन प्रथाएं
    • विपणन केन्द्र
    • आईएसओ 18000/आईएसओ 22000/आईएसओ 27000 प्रमाणीकरण के लिए भरपाई
  • एनएसआईसी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहकारी योजना
    • एनएसआईसी द्वारा विदेशों में अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी प्रदर्शनी का आयोजन और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी/व्यापार मेले में भागीदारी
    • विदेशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी/व्यापार मेले
    • भारत में घरेलू प्रदर्शनी का आयोजन और प्रदर्शनी/व्यापार मेले में भागीदारी
    • अन्य संगठनों/औद्योगिक संघों/एजेंसियों द्वारा आयोजित प्रदर्शनियों के सह—प्रायोजन के लिए समर्थन
    • क्रेता—विक्रेता सम्मेलन
    • गहन अभियान और विपणन प्रचार कार्यक्रम
  • वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा बाज़ार पहुंच पहल (एमएआई): इस योजना के अंशों में शामिल है
    • विदेशों में विपणन परियोजनाएं
    • क्षमता निर्माण
    • वैधानिक अनुपालन के लिए समर्थन
    • अध्ययन
    • परियोजना विकास
    • अन्य विविध प्रकार

बी. बीएमओ द्वारा विपणन समर्थन

 

विपणन प्रचार में अपने सदस्यों का समर्थन करने के लिए बीएमओ द्वारा कई गतिविधियां लागू की गई हैं। इनमें शामिल हैं

  • सदस्यों की निर्देशिका
  • क्रेता—विक्रेता सम्मेलन का आयोजन
  • राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भागीदारी
  • ऑनलाइन विपणन के लिए सार्वजनिक वेबसाइट

 

लीडर्स की कलम से

श्री विरांची शाह, भारतीय दवा निर्माण संघ (आईडीएमए—जीएसबी)

आईडीएमए, भारतीय फार्मा उद्योग के विकास के उद्देश्य से वर्ष 1961 में स्थापित एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था है. इसमें 900 सदस्य हैं और 100% सदस्यों ने जीएमपी को अपना लिया है. गुजरात में इस उद्योग का अनुमानित कारोबार 28000 करोड़ रुपए है.

आईडीएमए, फार्मा निर्माताओं के लिए पिछले 6 वर्षों से एक स्वास्थ्य सेवा प्रदर्शनी, फार्मेक इंडिया का आयोजन कर रही है. इस प्रदर्शनी का उद्देश्य है क्रेता—विक्रेता सम्मेलन के लिए मंच प्रदान करना और फार्मा उद्योग के विपणन अवसरों को बढ़ाना. अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी, सेमिनार, विक्रेता विकास बातचीत और नेटवर्किंग रात्रिभोज जैसी गतिविधियां फार्मेक इंडिया की मुख्य विशेषताएं हैं.

 

फार्मेक इंडिया कार्यक्रमों की विशाल सफलता को देखते हुए, फार्मेक इंडिया आयोजित कराने के लिए हमें कई संदेश प्राप्त हुए हैं और हमने भारत के विभिन्न शहरों में फार्मेक इंडिया का शुभारंभ करने द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर गुजरात फार्मा उद्योग को प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है. हमने इसमें एक और विशेषता जोड़ी है जो है विक्रेता विकास कार्यक्रम. कई बड़ी कम्पनियां नियमित आधार पर विक्रेताओं की तलाश कर रही हैं, बड़ी और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के निर्णय निर्माता संभावित विक्रेताओं से बातचीत करने के लिए मंच पर मौजूद होते हैं. यह निवेश, तकनीक हस्तांतरण और अनुबंधित निर्माण के लिए रास्ते खोलता है. चीन, कोरिया, जापान, इंडोनेशिया, आदि जैसे देशों से आए कई प्रतिभागियों ने भी दौरा किया.