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जानें कि भारतीय एसएमई आम चुनाव 2019 से क्या उम्मीद कर रहे हैं

सफलता के लिए प्रयासरत एसएमई के समक्ष कई चुनौतियां हैं. सरकार द्वारा किए गए डिमॉनेटाइजेशन और जीएसटी के चलते ढेरों अवसरों और असफलताओं का एक साथ सामना करना पड़ा

हालांकि, एसएमई को आम चुनाव 2019 और उसके बाद नवनिर्वाचित सरकार से काफी उम्मीदें हैं. इस लेख में, हम उनमें से कुछ पर प्रकाश डाल रहे हैं

 

1. एसएमई के लिए बेहतर फाइनेंशियल स्कीम

हर बिज़नेस को अलग-अलग समय पर धन प्रप्ति के सुविधाजनक विकल्प की तलाश होती है. वर्तमान में एसएमई के वित्तपोषण हेतु 59 मिनट में पैसे उपलब्ध कराने वाली मुद्रा और एमएसएमई लोन जैसी कई सरकारी योजनाएं मौजूद हैं. ये एसएमई को लागत-प्रभावी फाइनेंशियल समाधान प्रदान करती हैं

यद्यपि इन योजनाओं ने एसएमई को परेशान करने वाली फाइनेंशियल चुनौतियों को हल करने के लिए काफी काम किया है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना है. ऐसे में, चुनाव के बाद एसएमई नई सरकार से उद्योग-अनुकूल ऐसी फाइनेंशियल नीतियों का अनुमान लगा रहे हैं जो उन्हें लंबे समय तक बढ़ने में मदद करें

 

2. लाभकारी जीएसटी दरें

जीएसटी के आने से ढेरों लाभ मिले जैसे कि, टैक्स अनुपालन में आसानी व कई सारे टैक्स का हटना. हालांकि, शुरू की गई नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में अभी भी टैक्स फाइलिंग और दरों से संबंधित कुछ अड़चनें हैं

इसलिए, एसएमई नवनिर्वाचित सरकार से बेहतर और लाभकारी जीएसटी दरों के निर्माण की उम्मीद कर रहे हैं जिससे उन्हें लंबे समय में लाभ हो. हालांकि जीएसटी में नामांकन के लिए न्यूनतम सीमा को देर से संशोधित किया गया है, फिर भी जीएसटी के तहत अधिक से अधिक फर्मों को लाना इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है

 

3. एंजल टैक्स में छूट

भारत सरकार एंजल निवेशकों द्वारा वित्त पोषित स्टार्ट-अप्स पर 30% एंजल टैक्स लगाती है. एसएमई को एंजल टैक्स से छूट की उम्मीद है क्योंकि आयकर विभाग द्वारा लगाए गए उच्च दंड शुल्क के कारण लोग इस टैक्स का भुगतान करने में विफल रहते हैं, यह उनके वित्त पर टोल के रूप में बोझ बन जाता है

एसएमई को डर है कि इस तरह के दंड शुल्क निवेशकों को निवेश करने से रोक सकते हैं. इसलिए, एसएमई के बीच आम सहमति है कि चुनाव के बाद नई सरकार इस कर को समाप्त कर देगी

 

4. डिजिटलाइजेशन के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार

सरकार ने अपने डिजिटल इंडिया और मेकिंग इन इंडिया स्कीम से रोजगार के ढेरों अवसर पैदा किए हैं. कई स्टार्ट-अप का डिजिटलीकरण किया गया, और रोजगार को गति दी गई. हालांकि, भारत के ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी लेनदेन के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने हेतु बेहतर बुनियादी ढांचे की मांग बनी हुई है

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अधिक संख्या में वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित करके डिजिटलाइजेशन को बढ़ा कर एसएमई को छोटे शहरों में परिचालन स्थापित करने में सक्षम बनाया जाएगा, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से शहरी-ग्रामीण अंतर को कम किया जा सकेगा. साथ ही, इसका बॉटम लाइन राजस्व पर सीधा सकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा

 

और अंत में

आम चुनावों के बाद नवनिर्वाचित सरकार से एसएमई को बहुत अधिक अपेक्षा है. भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को आगे ले जाने के लिए बेहद अहम होगा कि सरकार एसएमई की उम्मीदों पर खरी उतरे और उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करके मजबूत व ठोस समाधान दे

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