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अपने नए सेल्स मैनेजर की ट्रेनिंग आपको कुछ यूं करनी चाहिए

वैसे तो अधिकतर सेल्स मैनेजरों की भूमिकाएं पहले से तय होती हैं जिनमें बिक्री रणनीतियां लागू करना, रुझानों पर नज़र रखना और लक्ष्य हासिल करना आदि शामिल होते हैं, पर एक और चीज़ ऐसी है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है, वह है ट्रेनिंग

अनुभवी से अनुभवी सेल्स प्रोफ़ेशनल को ट्रेनिंग की ज़रूरत पड़ती है और यदि आपको कोई नया मैनेजर काम पर रखना है तब तो ट्रेनिंग और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि एक कारोबारी होने के नाते आपको अपने नए सेल्स मैनेजर को किस प्रकार ट्रेनिंग देनी चाहिए

 

1. ट्रेनिंग देने और प्रेरित करने के लिए कामयाबी की कहानियों का इस्तेमाल करें

बिना किसी असल उदाहरण के सिद्धांतों पर जोर देते रहना प्रेरणा नहीं देता बल्कि इसका उल्टा करता है। प्रेरणा एक ऐसा मुख्य घटक है जो लोगों को उत्कृष्टता हासिल करने की दिशा में बढ़ने का बल देती है। असल में, कभी-कभी कर्मचारी सिर्फ प्रेरणा के बूते ही उम्मीद से भी बेहतर नतीजे हासिल कर लेते हैं। ट्रेनिंग में इस बात की कहानियां और केस अध्ययन शामिल करना पक्का करें कि कौनसी चीजें कामयाब रहीं और कौनसी नहीं

जो चीजें कामयाब रहीं उनकी प्रक्रिया को ऐसे छोटे-छोटे चरणों में बांटकर समझाएं जिन्हें नया सेल्स मैनेजर लागू कर सके और बार-बार दोहरा सके। साथ-ही-साथ नाकामयाब होने वाली प्रक्रियाएं भी बताएं ताकि नया मैनेजर आगे कभी उस रास्ते जाना चाहे तो सावधान हो जाए

 

2. दूसरे विभागों से उनका परिचय कराएं

कुशल सेल्स मैनेजर वह है जिसके पास अपनी कंपनी के सभी विभागों की कार्य प्रणाली की जानकारी होती है, जिसके आधार पर वह रणनीतियां तैयार करता है। ऐसा हो पाए इसके लिए विभागों के बीच संचार का होना बहुत जरूरी होता है

इसलिए ट्रेनिंग की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण भाग यह है कि अपनी कंपनी के बाकी सभी विभागों से अपने नए मैनेजर का परिचय कराएं। संचार के बाधामुक्त मार्ग स्थापित करने में उसकी मदद करें क्योंकि इससे कारोबार को ऊपर से नीचे तक समझने में मदद मिलती है, जिससे बिक्री प्रक्रिया की कुशलता में इजाफा होता है

 

3. माइक्रो ट्रेनिंग चुनें

ट्रेनिंग को कई दिनों या घंटों तक खींचने की बजाय, माइक्रो ट्रेनिंग चुनने में समझदारी है। कई अध्ययनों से पता चला है कि माइक्रो ट्रेनिंग, पारंपरिक ट्रेनिंग से ज्यादा प्रभावी होती है और वह कहीं अधिक संलग्नता उत्पन्न करती है। इससे दिमाग कहीं अधिक जानकारी अपने पास बनाए रख पाता है

माइक्रो ट्रेनिंग कई तरीकों से दी जा सकती है, जैसे छोटे-छोटे वीडियो और वेबिनार। साथ-ही-साथ, इन वीडियो और अवधारणाओं की एक लाइब्रेरी बना लेना भी अच्छा रहेगा, क्योंकि नए-नए भर्ती हुए सेल्स मैनेजर जरूरत पड़ने पर उसकी मदद ले पाएंगे

 

4. ताकतों और कमजोरियों की पहचान करें

ट्रेनिंग के दौरान, अपने मैनेजर की संभावित ताकतों और कमजोरियों की पहचान करें। ध्यान दें कि कोई भी एक हुनर अकेला कोई डील पूरी करने के लिए काफी नहीं होता है। साथ ही, अपने हुनर और कमजोरियों की जानकारी होना कुशलता हासिल करने के रास्ते में फायदेमंद साबित हो सकता है

आप अपने मैनेजर से उसकी ताकतों पर काम करने को कह सकते हैं, पर यह भी पक्का करें कि वह जल्द से जल्द अपनी कमजोरियों पर भी काम करे। साथ ही, अगर आप यह पाएं कि आपके मैनेजर में कोई ख़ास विशेषज्ञता है, तो मनचाहा नतीजा हासिल करने के लिए उसे बढ़ावा दें

ट्रेनिंग सत्र शुरू करने से पहले यह पक्का कर लें कि आपने उसका एजेंडा बना लिया हो। ट्रेनिंग के दौरान उसका पालन करें और सुनिश्चित करें कि आप उससे भटकें नहीं। हर सत्र का अपना एक अलग एजेंडा होना चाहिए। सत्र के अंत में एक प्रश्नोत्तरी राउंड जरूर रखें जिसमें आपके नए सेल्स मैनेजर के जो भी प्रश्न और शंकाएं हों उनका निराकरण करें

अपने कैश फ़्लो को बेहतर बनाना और अपनी सेल्स टीम को मजबूती देना महत्वपूर्ण है। अधिक सेल्स कर्मी होने से आपकी कंपनी की अधिक रेवेन्यू हासिल करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं