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जानें कैसे वैकल्पिक लेंडिंग प्लेटफॉर्म भारत में एसएमई के वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहे हैं

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है. भारतीय अर्थव्यवस्था की इस व्यापक वृद्धि के पीछे लघु और मध्यम उद्यमों (एसएमई) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. मुख्य तौर पर, भारत में लगभग 43 मिलियन एसएमई हैं, जो देश में 40 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को रोजगार देते हैं

हालांकि, ये आंकड़े कितने भी अधिक क्यों न हों, लेकिन जब भी भारत में एसएमई को बड़ी इकाइयों में अपने कारोबार का विस्तार करने की बात आती है, तो उन्हें अक्सर बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है. एसएमई द्वारा सामना की गई इन चुनौतियों में से सबसे अधिक प्रचलित कार्यशील पूंजी की कमी है. क्रिसिल के एक अध्ययन के अनुसार, भारतीय एसएमई को आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए रु. 5.15 लाख करोड़ की आवश्यकता होती है

 

एसएमई को आने वाली वित्तीय चुनौतियां

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, भारत में एसएमई के पास अपनी वृद्धि को बढ़ाने के लिए आवश्यक वित्त तक सीमित पहुंच थी. पारंपरिक ऋणदाताओं द्वारा इस क्षेत्र में रुचि न लेना और फंड प्रदान न करना इसका मुख्य कारण है. कड़े ऋण मानदंड और उच्च ब्याज दर के कारण इन संस्थानों से मिलने वाले ऋण छोटे व्यवसायों के लिए फायदेमंद होने की बजाय नुकसान दायक होते हैं

नतीजन, अधिकांश एसएमई को अपने व्यवसाय के विकास के लिए धन जुटाना एक चुनौतीपूर्ण काम लगता है. बिना किसी साधन के या तो वह स्थिर हो जाते हैं, या फिर बेईमान ऋण दाताओं के जाल में फंस हैं, जो उनसे बेहद अधिक ब्याज वसूलते हैं

 

वैकल्पिक लेंडिंग प्लेटफॉर्म ने एसएमई की वित्तीय समावेशन में कैसे मदद की?

सरकार ने लघु व्यवसाय इकाइयों को आसान वित्त प्रदान करने पर अधिक जोर दिया, सरकार के साथ-साथ कई गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान भी भारत में संघर्षरत एसएमई को वित्तीय मदद देने के लिए आगे आए. आज, अधिकांश भारतीय एमएसएमई ऋण प्राप्त करने और अपने कैशफ्लो की कमी को पूरा करने के लिए इन वैकल्पिक लेंडिंग प्लेटफॉर्म पर निर्भर कर रहे हैं

इंडियन क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (आईसीआरए) के अनुसार, एसएमई के लिए नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (एनबीएफसी) द्वारा ऋण देने की हिस्सेदारी मार्च 2022 तक 22-23 प्रतिशत बढ़ जाएगी. भारत में पिछले दो वर्षों से एसएमई के लिए ऋण की राशि का वितरण निरंतर बढ़ रहा है, इस गति को बनाए रखने के लिए लेंडिंग संस्थानों को धन्यवाद

 

भारत में एसएमई, वित्तीय समावेशन से कैसे लाभान्वित हो रहे हैं?

ऋण के लिए आसान शर्तों, सुविधाजनक पुनर्भुगतान विकल्पों और प्रतिस्पर्धात्मक कम ब्याज दरों के साथ, भारत में स्टार्ट-अप और एसएमई को ऋण आसानी से प्राप्त हो रहे हैं, जो उनके विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. मॉर्गन-स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ई-कॉमर्स स्टार्ट-अप सालाना 30 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और 2026 तक इसके 200 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है

बड़े पैमाने पर, यह वृद्धि मेट्रोपॉलिटन शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत के टीयर 2 और टीयर 3 शहरों को भी इतना ही फायदा हो रहा है. बीसीजी की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि 2025 तक भारत में कुल ऋण खपत का 45 प्रतिशत हिस्सा इन शहरों का होगा. इसका अर्थ है कि भारत में वैकल्पिक लेंडिंग प्लेटफॉर्म ने एसएमई के लिए वैश्विक बाजार में बड़े हिस्से को विकसित करने और वहां काबिज होने के शानदार अवसर प्रदान किए हैं

रिलायंस मनी भारत की शीर्ष एनबीएफसी में से एक है, जो एसएमई को स्मॉल बिज़नेस लोन देकर भारतीय एमएसएमई के वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रही है. यह लोन लेना बेहद आसान है और इसमें सुविधाजनक अवधि व सरल पुनर्भुगतान विकल्प उपलब्ध हैं