ताजा अपडेट के लिए सब्सक्राइब करें

Text to Identify Refresh CAPTCHA कैप्चा रीफ्रेश करें

*साइन-अप करके मैं रिलायंस मनी से ई-मेल प्राप्त करने के लिए सहमत हूं

 

क्लाइंट डेटाबेस बनाते समय ध्यान रखने लायक बातें

कंपनियां, बड़े या छोटे उपक्रम, ऐसे टूल प्रयोग कर रहे हैं जो उनकी ग्राहक सहभागिता और कन्वर्जन गतिविधियों को संभालते हैं। मार्केटिंग के प्रभावी अभियान का संचालन, अच्छी गुणवत्ता वाले क्लाइंट डेटाबेस और मार्केटिंग की सशक्त तकनीक के तालमेल से ही संभव हो सकता है। हालांकि हमारे क्लाइंट डेटाबेस को ऑटोमेशन सुईट में फीड करने के चरण में पहुंचने से पहले, सटीक और अद्यतन क्लाइंट डेटाबेस इस दिशा में पहला कदम है

क्लाइंट डेटाबेस में प्रत्येक क्लाइंट के बारे में आपके व्यवसाय के अनुसार उपयुक्त सूचनाओं का सेट होता है। चाहे कोई नया स्टार्टअप हो, एसएमई हो, या बड़ी कंपनी हो, इन सभी को सही और अपडेट संपर्क व अन्य विवरणों वाला क्लाइंट डेटाबेस बनाने की आवश्यकता होती है। यह डेटाबेस, मौजूदा तथा संभावित क्लाइंट्‌स तक पहुंचने, प्रभावी मार्केटिंग अभियान चलाने, ग्राहकों की खरीदारी संबंधी आदतें समझने, तथा बिक्री रूझान समझने के लिए मासिक व वार्षिक रिपोर्टें तैयार करने में मदद करता है

हालांकि कोई दो व्यवसाय एक जैसे नहीं होते, और हर एक की अपनी गतिशीलताएं और विशेषताएं होती हैं, जिनके अनुसार कार्यवाही करनी होती है। क्लाइंट डेटाबेस बनाने से पहले जिन बातों पर आपको विचार करना चाहिए, उनका संक्षेप में विवरण नीचे दिया गया है

 

अपने उद्योग क्षेत्र को जानें

मोटे तौर पर, कारोबारी परिवेश को बी2बी या बी2सी गतिविधि के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। लक्षित ग्राहक वर्ग को समझने के लिए, जो कि कंपनी के उत्पादों/सेवाओं के अंतिम उपयोक्ता हो सकते हैं, व्यापक दर्शक/ग्राहक वर्ग को जानना पहला कदम है

 

अपने उत्पादों/सेवाओं को जानें

किसी कंपनी द्वारा बेचे जाने वाले उत्पादों/सेवाओं की प्रकृति को समझना बहुत महत्त्वपूर्ण है। आपके उत्पादों/सेवाओं की गहरी जानकारी, भविष्य में क्लाइंट्‌स को व्यवस्थित और निर्धारित करने की दिशा में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है

 

लक्षित ग्राहक वर्ग को निर्धारित करना

व्यापक स्तर पर लक्षित ग्राहक वर्ग तथा आपके उत्पादों/सेवाओं की उपयोगिता को समझने से लक्षित ग्राहक वर्ग को पहचानना और निर्धारित करना काफी आसान हो जाता है। आपके लक्षित ग्राहक वर्ग को निर्धारित करने से स्वतः ही आपको ऐसे चैनल या प्लेटफार्म निर्धारित करने में भी मदद मिलती है, जिनके जरिए आप उन तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, प्रभाव डालने वाली चीज़ों की पहचान करने तथा उनको डेटाबेस में शामिल करने से भी आपके व्यवसाय को एक अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। प्रभावशाली कारक आपके अंतिम क्लाइंट नहीं हो सकते हैं लेकिन वे बिक्री बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं

 

अपने क्लाइंट को जानें

अब, अपने क्लाइंट के पूरे और सटीक ब्यौरे प्राप्त करते हुए उसे भलीभांति जानना, सबसे महत्त्वपूर्ण कदम है। यह स्पष्ट करना महत्त्वपूर्ण है कि किस जानकारी को एकत्रित करने की ज़रूरत है, इसे कैसे एकत्रित करना है, और इसे कैसे प्रबंधित किया जाएगा। यह आपके व्यावसायिक उद्‌देश्यों के आधार पर निर्धारित होना चाहिए। अच्छा क्लाइंट डेटाबेस वह होता है जिसमें क्लाइंट के सटीक और अपडेटेड विवरण होते हैं और इससे उनसे संबंध विकसित करने तथा व्यावसायिक उद्‌देश्य पूरे करने में सहायता मिलती है

हालांकि क्लाइंट डेटाबेस बनाने के लिए कोई सर्वस्वीकृत समाधान नहीं है, ये कारक, आरंभिक चरणों में स्थिर रहते हैं। आपके व्यवसाय की वृद्धि करने व बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण क्लाइंट डेटाबेस, प्रभावी मार्केटिंग अभियान तय करने में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है