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छोटे और मझोले उद्योगों के लिए फंड रेज़ करने का महत्व

भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और देश के विकास में सहयोग देने में SME सेक्टर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में 42.50 मिलियन SMEs है। यह पंजीकृत या अपंजीकृत SMEs कुल वर्किंग पॉपुलेशन के 40% वर्क फोर्स को रोजगार प्रदान करते हैं। इन SMEs को अपने प्रतिष्ठानों को चलाने और बढ़ाने के लिए बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ती है। पैसा किसी भी बिजनेस का मुख्य भाग होता है, और बिजनेस को सही तरीके से संचालित करने के लिए पैसा बहुत जरूरी होता है। संचालन के पहले साल में अधिकतर SME पैसे की कमी से जूझते हैं और यह इनके बंद हो जाने का सबसे प्रमुख कारण है। बहुत से लक्ष्य होते हैं जिन्हें पूरा करने के लिए SME अपने बिजनेस के लिए फंड रेज़ कर सकते हैं

 

विस्तार:-

किसी भी बिजनेसमैन के लिए फंड रेज़ करने का मुख्य उद्देश्य आने वाले कुछ सालों में बिजनेस का विस्तार और वृद्धि होती है। बिजनेस की क्षमता बढ़ाने जैसे कि कच्चा माल खरीदने, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाओं का विस्तार करने, मार्केटिंग और प्रमोशन आदि कामों के लिए पैसे की जरूरत पड़ती है

 

असेट्स खरीदना:-

एसेट्स किसी भी बिजनेस की आधारशिला होते हैं। पैसा, उपकरण, जमीन, बिल्डिंग आदि एसेट्स के कुछ प्रकार हैं। फंड रेज़ करने से एसेट्स को खरीदने की प्रक्रिया आसान हो जाती है

 

कामकाज़ में तेज़ी लाना:-

फंड रेज़ करने से बिजनेस की रोजाना की जरूरतों के लिए वर्किंग कैपिटल का इंतजाम हो जाता है जिससे कामकाज में तेजी आती है। इसके अलावा इससे पू्रे किए जा सकने वाले कुछ अन्य खर्चे हैं - कर्मचारियों का वेतन, गोदाम के रखरखाव पर होने वाला खर्च, भंडारण के लिए जगह, सामान के प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग का खर्चा, ट्रांसपोर्टेशन इत्यादि

 

डेब्ट रीकंस्ट्रक्शन:-

हर बिजनेस को कभी न कभी फाइनेंसियल समस्याओं का सामना जरूर करना पड़ता है। ऐसी स्थितियों में डेब्ट रीकंस्ट्रक्शन आप को बचा सकता है। सीधे शब्दों में, यह कर्ज़ को घटाता है और इसका रीकंस्ट्रक्शन करता है, जिससे एक उद्यमी पर पड़ा अतिरिक्त बोझ काफी हद तक कम हो जाता है

SMEs के लिए फंड रेज़ करने के बहुत से तरीके होते हैं - प्राइवेट संस्थानों से और सार्वजनिक संस्थानों से। इसके लिए एक स्ट्रेटेजी बना लेना सही रहता है। एक कंपनी विभिन्न प्रकारों से फंड रेज़ कर सकती है, जैसे कि

 

बैंक और NBFCs:-

आजकल प्राइवेट और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के बैंक और विभिन्न NBFCs आकर्षक लोन सुविधा प्रदान करते हैं, आप निश्चित तौर पर इससे फायदा उठा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आप को विभिन्न प्रक्रियाओं, डॉक्यूमेंटेशन आदि से गुजरना होगा और फंड प्रदाता को आपके बिजनेस की वृद्धि के बारे में आश्वस्त करना होगा

 

दोस्त और रिश्तेदार:-

अपने बिजनेस के विस्तार के लिए दोस्तों और रिश्तेदारों से मदद लेना हमेशा फायदेमंद रहता है। यहां आप वाजिब लागत पर विश्वास और पारदर्शिता की उम्मीद कर सकते हैं। साथ ही यह आपको लोन की राशि की चिंता किए बिना अधिक समय लेने की अनुमति देता है

 

क्राउडफंडिंग:-

क्राउड फंडिंग का अर्थ होता है बहुत सारे लोगों की मदद से फंड रेज़ करना, खास तौर पर बहुत से नए बिजनेस प्लान और सामाजिक उद्यम इस माध्यम से फंड रेज़ करते हैं, इसने बहुत से विचारों को धरातल पर लाने में और फलने-फूलने में मदद की है। अगर आप अपनी बिजनेस स्किल्स के बारे में पूरी तरह से आश्वस्त हैं और यह समझते हैं कि इससे समाज का फायदा होगा, तो क्राउड फंडिंग के द्वारा निश्चित तौर पर आप फंड रेज़ कर पाएंगे। अगर आप लोगों को अपने लक्ष्य समझा पाते हैं तो यह आपके लिए बहुत मददगार होगा

 

तो यह स्पष्ट है कि, SME’s के लिए पैसा जीवनधारा के समान होता है, आप की वर्तमान स्थिति को सुदृढ़ करने और आपके फाइनेंसियल बिजनेस लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए फंड्स का उपयोग किया जाना चाहिए। व्यवस्थित तरीके से अपनी वृद्धि का आकलन करना, और उसके अनुसार भविष्य के विकास के लिए फंड जुटाना किसी भी SME के लिए सफलता की कुंजी है