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अभी भी पुशिंग वाले विज्ञापन कर रहे हैं? अब पुल मार्केटिंग का दौर आ चुका है!

विज्ञापनों और मार्केटिंग पर तकनीक का प्रभाव, तथा चीफ मार्केटिंग ऑफिसर का लगातार बदलता प्रोफाइल, अब बीते समय की बात हो गई है। मोटे तौर पर व्यवसाय दो बातों के लिए स्पर्धा करते हैं-ग्राहक के मन में स्थान, और समय; और यही चीज़ लोगों को इन दोनों बातों के प्रति सुरक्षात्मक रवैया अपनाने हेतु विवश करती है

वास्तविकता यह है कि मार्केटिंग स्केप और प्रयास, तकनीक या इसके अभाव पर केंद्रित होने से अधिक अब इस तथ्य पर टिक गए हैं जो मार्केटिंग संबंधों के स्थापित मानकों को नए सिरे से पारिभाषित करने की क्षमता रखता है। यह तथ्य है ध्यान (ध्यानाकर्षण)। मार्केटर के लिए, अपने ग्राहक आधार से जुड़ने का प्रयास करने के लिए अपने तरीके की नई समीक्षा करना अब ज़रूरी हो चुका है

 

पुश से पुल-अब यह बदलाव क्यों ज़रूरी है?

विज्ञापनों की दुनिया में तकनीक का दखल बढ़ते जाने के बावजूद, परंपरागत मार्केटिंग स्कोप या पुश मार्केटिंग अभी भी 3 'I' -इंटरसेप्ट, आइसोलेट, इंसुलेट-से संचालित होती है, जो कि ऐसी पुरानी प्रक्रिया श्रृंखला है जिसका लक्ष्य लोगों तक विषयवस्तु/संदेश को पुश करना (धकलेना) होता है, और ग्राहकों की सबस्क्राइब करने की इच्छा, या उत्पाद अथवा सेवा खरीदने की इच्छा को ज्यादा महत्त्व नहीं दिया जाता। इंटरसेप्ट वह प्रक्रिया है जिसे विज्ञापनदाता और मार्केटर, आम जनता का ध्यान खींचने के लिए अपनाते हैं, लोग चाहे जहां भी हों। जब मार्केटर यह कर लेते हैं, तब ग्राहक को पृथक (आइसोलेट) करना उनका अगला कदम होता है, ताकि वह बिना किसी व्यवधान के उनके संदेश को ग्रहण कर सके। और अंत में, इंसुलेट का चरण है, जिसमें मार्केटर एक काल्पनिक संसार रचते हैं, जिसमें व्यक्ति को अंतिम लाभार्थी की तरह प्रस्तुत किया जाता है, जिसकी ओर सारे प्रयास, प्रचार, और अभियान केंद्रित होते हैं

सामान्यतया व्यवधानकारी मानी जाने वाली पुश मार्केटिंग का महत्त्व और प्रासंगिकता दिनोंदिन कम होते जा रहे हैं, जिसका प्रमुख कारण ये है कि इसमें औसत ग्राहक को पैक से चुनने का प्रयास किया जाता है, और यह कुछ ऐसा है जो उनको सदैव प्रसन्न नहीं कर सकता है। इसके अलावा, मार्केटिंग का बजट सीमित होने पर भी पुश मार्केटिंग, अधिक लागत-कुशल नहीं साबित हो सकती है

पुल मार्केटिंग में एकदम भिन्न तरीका अपनाया जाता है, जिसमें पारंपरिक तरीके की तुलना में कम हस्तक्षेप या दखलंदाजी वाली विधियों से ग्राहक को ब्रांड से परिचित कराना, मार्केटर का मुख्य उद्‌देश्य होता है। मौखिक प्रचार-प्रसार, संदर्भ (रेफरल्स), मास मीडिया मार्केटिंग आदि कुछ सामान्य स्वीकृत तरीके हैं। विशुद्ध व्यावसायिक दृष्टिकोण से, जहां पुश मार्केटिंग बिक्री राजस्व बढ़ाने पर केंद्रित होती है, वहीं पुल मार्केटिंग ब्रांड के प्रति निष्ठा बढ़ाने, तथा खरीदारी दोहराने वाले ग्राहकों को जोड़ने पर केंद्रित होती है

3 I’ के बजाय, पुल मार्केटिंग 3 A से अधिक मेल खाती है-अट्रैक्ट (आकर्षित करना), असिस्ट (सहायता करना), और अंत में एफिलिएट (सम्बद्ध करना)। जहां 'अट्रैक्ट' वह प्रक्रिया है जिसमें ग्राहक को मार्केटर खोजता है, बिक्री-पूर्व और पश्चात सेवाएं प्रदान करते हुए ग्राहक को 'असिस्ट' किया जाता है, और इस तरह ग्राहक को खरीद में अधिक मूल्य पाने में मदद मिलती है। अंत में, 'एफिलिएट' के तहत अनेक प्रतिभागियों को मिक्स में लाया जाता है, कि जहां खरीदार/उपयोक्ता के लिए मार्केटर के परिवेश से आपसी व्यवहार करना अपेक्षाकृत सुविधाजनक बन जाता है

यहां महत्त्वपूर्ण 'राइडर' ये है कि पुश से पुल मार्केटिंग की ओर बदलाव, अब वैकल्पिक नहीं रह गया है। सभी उद्यम-उनका आकार, प्रचालन दायरा, और कारोबारी अवधि चाहे जो भी हो,-उनको बदलते समय की इस मांग को पूरा करना ही होगा और तत्काल विवेकसम्मत ढंग से कदम उठाने होंगे। इसके अलावा, जो कंपनियां अभी भी अगला कदम उठाने के बारे में सोच-विचार कर रही हैं, और जो अभी शांत बैठी हैं, उनका स्थान लेने के लिए अपेक्षाकृत नई और अधिक संभावनाशील कंपनियां आ सकती हैं, जो अपने ग्राहकों को अभूतपूर्व लाभ प्रदान करते हुए उनसे जुड़ने की इच्छुक हों

   

सलाहकार का कार्य

पुल मार्केटिंग में खुद को आजमाने से पहले मार्केटर्स को अपने प्रचालनों को प्रभावी विस्तार देने के लिए डिजिटलीकरण और बिग डेटा का सहारा लेना होगा। इसका सीधा सा कारण ये है कि डेटा हार्वेस्टिंग की दक्ष प्रणाली अपनाने से उन्हें उनके क्लाइंट्‌स के खरीद रिकार्ड और व्यवहार से संबंधित ऐतिहासिक डेटा का लाभ उठाने में मदद मिलेगी, और इससे वे अपने ग्राहकों की सटीक अपेक्षाओं के बारे में अपनी सार्थक अंतर्दृष्टि विकसित कर सकते हैं

ग्राहक की सहायता (असिस्टेंस) के तौर-तरीकों में बदलाव एक अन्य चीज़ है, जो इंतज़ार कर रही है, जिसमें प्रतिक्रियाशील तरीके को बदलकर पूर्वसक्रिय तरीका अपनाना होगा। कुल मिलाकर अपेक्षाकृत जल्दी ही सभी ग्राहक विज्ञापनदाताओं से मार्गदर्शक की भूमिका उपयुक्त तरह से निभाने की अपेक्षा करने लगेंगे, एक कुशल सलाहकार, जो सबसे महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने में उनको आसानी दे सकता हो

 

अपेक्षित कुशलताओं का सेट

मार्केटिंग में ऐसा क्रांतिकारी बदलाव रातोंरात नहीं हो सकता। न केवल विज्ञापनदाताओं को अधिक तकनीक कुशल बनना होगा, बल्कि विभिन्न मार्केटिंग अभियानों और कार्यक्रमों से डिजिटलीकरण को एकीकृत करते हुए उनको शीघ्र ही बिग डेटा की स्पीड से अपना तालमेल बनाना होगा

व्यक्तिगत मार्केटर्स के लिए, ग्राहक के प्रति समानुभूति और उत्पाद/सेवा हेतु प्रेरित भावना ही यथास्थिति में बदलाव की कुंजी बनेंगी और फिर ऐसी प्रक्रिया स्थापित होगी जो लंबे समय में भरपूर लाभ प्रदान करेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अंततः अपने ग्राहकों के नजरिए से ही अपने बारे में सोचने की सामर्थ्य तथा ज़रूरत होने पर समानुभुति के साथ लाभ उठाने की कुशलता ही किसी कुशल मार्केटर को बाकी दूसरों से अलग साबित करेगी

पुल मार्केटिंग वास्तव में अधिक लागत-कुशल है और सभी प्रयासों को व्यवस्थित करते हुए उनको इस अगली पीढ़ी के मार्केटिंग प्रयास पर केंद्रित करना ही सर्वोत्तम है, जिसका दौर अब आ चुका है और इससे तालमेल बनाने में ही हित है