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विमुद्रीकरण के बाद के युग में SME—बदलाव के दौर में मानसिकता में परिवर्तन की गारंटी-मिस्टर. के.वी.श्रीनिवासन

 

8 नवंबर को बड़ी मात्रा में भारत की मुद्रा भंडार का विमुद्रीकरण करने के लिए सरकार का निर्णय संभावित रूप से एक स्थिति परिवर्तक साबित हुआ है। हम नकदी उन्मुख अर्थव्यवस्था के साथ बहुत सहज रहे हैं और व्यापार, विशेषकर छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्यमों (“SME”) द्वारा, एक बड़े हिस्से का कामकाज नकदी में होता है

 

सरकार द्वारा दिया जा रहा वास्तविक संदेश यह है कि वे बेहतर ट्रैकिंग, उचित अनुकूल कर और उससे लाभ, कम कर दरों के लिए गैर—नकदी तरीकों (जैसे कि चेक/इलेक्ट्रॉनिक भुगतान) की ओर अर्थव्यवस्था को बढ़ाना चाहते हैं। अब बिजनेस से होने वाली आय के बेहतर अनुपालन और ईमानदारी से खुलासा करने के अलावा बचने का कोई रास्ता नहीं है। एक बार जीएसटी के लागू हो जाने पर, आय को छुपाने की संभावनाएं और कम हो जाएंगी। इसलिए, हमारे, विशेषकर SME, के सामने विकल्प है कि या तो बदलाव को अनदेखा कर आने वाले समय में कष्ट झेलें या फिर बदलाव को अपनाकर अधिक पारदर्शिता से लाभ उठाएं। आदर्श रूप से, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और भुगतान के इलेक्ट्रॉनिक तरीकों का स्वागत करना चाहिए। नकदी के प्रति लगाव को छोड़नाऔर भुगतान के बैंकिंग/इलेक्ट्रॉनिक तरीकों को स्वीकार करने के लिए मानसिकता में एक पूर्ण परिवर्तन की आवश्यकता होगी

 

कंपनी में परिवर्तित हो रहे छोटे एवं मध्यम वर्ग के वे उद्योग जो ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक तरीकों के माध्यम से लेन—देन करते हैं, को निम्नलिखित कई लाभ होंगे

  • अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा मुख्यधारा में आएगा.
  • छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योग अपने वित्त पर अधिक नियंत्रण से लाभ उठा सकते हैं.
  • उनके लिए नए बाज़ार खुल सकते हैं — उदाहरण के लिए ई—कॉमर्स का एक बड़ा भाग नकदी रहित भुगतान प्रणाली पर कार्य करता है और SME इस सेक्शन से आसानी से जुड़ सकते हैं.
  • बैंक एवं वित्तीय संस्थान ऐसे छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों को ऋण देने के लिए खुलकर सामने आगे आएंगे जो विश्वसनीय तरीके से व्यापार संबंधी आंकड़ों की जानकारी देंगे — इसससे छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों की विकास दर में वृद्धि होगी.
  • वे अपनी वास्तविक वृद्धि सूचित कर सकते हैं और इस प्रकार अपने व्यवसायों के लिए बाहरी निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं.
 

पारंपरिक रूप से, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योग नई तकनीक एवं परिवर्तनों को अपनाने में पीछे रहे हैं और कई बार इसने इनकी वृद्धि के रास्ते में रोड़ा खड़ा किया है। संभवत: छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों के लिए अपनी व्यापारिक कलेक्शन और भुगतानों का प्रबंधन करने के लिए किसी पारंपरिक मानसिकता से दूर जाने और डिजिटल होने के लिए यह सर्वोत्तम समय है

 

कोई भी व्यक्ति छोटे से शुरूआत कर सकता है — जैसे कि कर्मचारियों का बैंक अकाउंट खुलवाने में मदद करने और उनके वेतन को उनके अकाउंट में जमा कराने, या उन्हें नकद के बजाय प्रीपेड कार्ड दिलवाने या फिर आपूर्तिकर्ताओं को एनईएफटी/आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान सुनिश्चित कराना। शुरूआत में इसका विरोध हो सकता है, लेकिन कुछ समय बाद यह स्वीकार्य हो जाएगा। आखिरकार, मानसिकता का बदलना एक धीमी प्रक्रिया है, है न

 

दुनिया डिजिटल हो रही है — क्या SME पीछे रह सकते हैं? नकदी रहित (कैशलैस) होना केवल समय की मांग ही नहीं, बल्कि उससे भी कहीं अधिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का एक उयोगी टूल साबित हो सकता है!