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2019 के चुनावों से पहले छोटे कारोबारों पर नज़र-ए-इनायत

देश 2019 के आम चुनावों के लिए कमर कस रहा है और ऐसे में सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले छोटे कारोबारियों को रिझाने के लिए कई योजनाओं की घोषणा कर दी है

सरकार छोटी इकाइयों के लिए वित्तीय सहायता के विभिन्न उपाय पेश कर रही है जिसमें लोन का पुनर्गठन और टैक्स लगाने के नियमों में बदलाव शामिल हैं, यानि कह सकते हैं कि सरकार अर्थव्यवस्था के इस बेहद महत्वपूर्ण खंड को अपने पक्ष में लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने में लगी हुई है

आइए देखें कि चुनाव में उतरने को तैयार सरकार ने छोटी इकाइयों को आकर्षित करने के लिए कौन-कौनसी घोषणाएं की हैं

 

1. जीएसटी छूट सीमा दोगुनी हुई

सरकार ने जीएसटी के तहत छूट की सीमा रु 20 लाख से दोगुनी करके रु 40 लाख कर दी है जो 1 अप्रैल, 2019 से प्रभावी हो जाएगी; इसे छोटे और मझोले कारोबारियों (एसएमई) के लिए एक बड़ी राहत माना जा सकता है। यह फैसला जीएसटी परिषद की 32वीं बैठक में लिया गया था

दूसरे शब्दों में, रु 40 लाख तक के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों को जीएसटी के तहत टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यह पहल 20 लाख एसएमई को फायदा पहुंचा सकती है और जीएसटी अनुपालन का बोझ घटा सकती है। ध्यान दें कि जीएसटी पेश किए जाने के समय से ही, इसकी प्रक्रिया की बारीकियां अधिकांश एसएमई के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। अधिकांश एसएमई ने जीएसटी लागू होने के बाद अपने टैक्स में वृद्धि की शिकायत की है

 

2. समाधान योजना की सीमा में बढ़ोतरी

सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए जीएसटी व्यवस्था के तहत समाधान योजना की सीमा रु 1 करोड़ से बढ़ाकर रु 1.5 करोड़ कर दी है। इस योजना के तहत व्यापारी और निर्माता 1% की रियायती दर पर टैक्स चुका सकते हैं

साथ ही, समाधान योजना के तहत आने वाले कारोबारियों को तिमाही अंतराल पर टैक्स चुकाना होता है, जबकि साधारण करदाता को हर महीने। तो पहले जो कारोबार अपना टर्नओवर रु 1 करोड़ से अधिक हो जाने के चलते समाधान योजना में पंजीयन नहीं करा सके थे वे अब इस योजना का लाभ उठा सकेंगे

 

3. लोन का एक-बार पुनर्गठन

वित्तीय सहयोग तक पहुंच देश के एसएमई के लिए लंबे समय से बनी हुई एक समस्या है। हालांकि बहुत से वित्तीय संस्थान कस्टमाइज्ड एसएमई लोन देते हैं, पर एसएमई को लोन वापस चुकाने में मुश्किलें आती हैं, जिनके चलते उन लोन को अनर्जक परिसंपत्ति (एनपीए) की श्रेणी में डालना पड़ता है और वे लोन विपत्तिकालीन की श्रेणी में आ जाते हैं

लोन के विपत्तिकालीन की श्रेणा में आ जाने पर एसएमई के लिए ज़रूरत पड़ने पर फंड हासिल कर पाना और भी मुश्किल हो जाता है। भारतीय रिजर्ब बैंक (आरबीआई) द्वारा घोषित नए नियमों के तहत बैंक, भुगतान में चूक करने वाली फर्मों के रु 25 करोड़ तक के लोन का एक-बार पुनर्गठन कर सकते हैं; यह घोषणा एसएमई के लिए राहत की खबर है। पुनर्गठन के लिए 31 मार्च, 2020 की समयसीमा तय की गई है

विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि ये उपाय आगामी चुनावों, जिनमें कांटे की टक्कर होने की संभावना है, को ध्यान में रखते हुए घोषित किए गए हैं, पर वे निश्चित तौर पर एसएमई को नोटबंदी के प्रभावों, चालू वित्तीय घाटे में वृद्धि का कारण बनने वाली घटनाओं, तेल की कीमतों में उछाल व अन्य चीजों से राहत दिलाएंगे

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