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ओह्स नियामक एमएसएमई रेक्वाइर्मेट्स

लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) को भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार माना जाता है। वे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के बड़े उद्योगों में बड़ी मात्रा में आपूर्ति एवं सेवाओं का योगदान करते हैं। इन MSME के संचालन में कई प्रक्रियाएं शामिल होती हैं, उनमें से बहुत-सी प्रकृति में जोखिम युक्त होती हैं और यदि समय रहते उचित कदम न उठाए जाएं तो बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। सुचारु उत्पादन और अनुकूलित लाभ सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षित संचालन प्रबंधन प्रमुख है। इसलिए, MSME को कानूनों में प्रदान की गई सुरक्षा और व्यावसायिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं पर ध्यान देना चाहिए और साथ-ही-साथ मनुष्य, मशीन और सामग्री समेत स्वास्थ्य व उचित संसाधनों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
वर्तमान में, भारत में व्यावसायिक स्वास्थ्य व सुरक्षा देश के श्रम एवं रोजगार विभाग द्वारा नियंत्रित की जाती है। इसके अलावा, फैक्टरी परामर्श सेवा एवं श्रम संस्थान महानिदेशालय (DGFASLI) निर्माण, बंदरगाहों पर पदोन्नति, अनुसंधान, प्रशिक्षण और परामर्श के लिए एक तकनीकी शाखा के रूप में कार्य करता है, जबकि खदान सुरक्षा निदेशालय खदानों पर ध्यान रखता है। ऐसी दो मार्गदर्शक ओएचएस नीतियां हैं

  • ILO समझौते 155 और 187 पर आधारित राष्ट्रीय सुरक्षा नीति (20 फरवरी, 2009)
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति (23 दिसंबर, 2005).

हालांकि, अभ्यास व कार्यान्वयन, जब भी आवश्यक और प्रासंगिक हो, के लिए सुरक्षा एवं व्यावसायिक स्वास्थ्य से संबंधित कई नियम एवं कानून हैं। भारत के संविधान के अनुसार, श्रम को समवर्ती सूची में रखा गया है, जिसका मतलब है कि केंद्र और राज्य दोनों विधि का निर्माण कर सकते हैं

ओएचएस के लिए विशिष्ट प्रमुख विधानों की मुख्य विशेषताएं एवं मूल कानून नीचे बताए गए हैं

 

कारखाना अधिनियम, 1948
कारखाना अधिनियम में 11 अध्याय और 3 अनुसूचियां हैं। स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का उल्लेख क्रमश: अध्याय-3 और अध्याय-4 में दिए गए हैं। जोखिम प्रक्रियाओं पर अध्याय-IVA 1984 को भोपाल गैस दुर्घटना के बाद शामिल किया गया था। पहली अनुसूची जोखिम प्रक्रियाओं की सूची प्रदान करती है जिसमें अध्याय-IVA के नियम लागू होते हैं। कारखाना अधिनियम को समय-समय पर संशोधित किया गया है। पिछला नवीनतम संशोधन 2015 में रहा, जिसमें बिना बिजली के 20 श्रमिकों और बिजली वाले 40 श्रमिकों वाले छोटे स्तर के संचालनों को बाहर करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसकी बजाय, 2016 में MSME के लिए, एक नया विधेयक, छोटे कारखाने (रोजगार की सुविधा एवं विनियम और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2015 प्रस्तावित किया गया है

 

कारखाना अधिनियम
कारखाना नियम राज्यों द्वारा अधिसूचित किए जाते हैं। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल उल्लेखनीय हैं। कुछ राज्यों ने पड़ोसी राज्यों के नियमों को अपनाया है जैसे कि हरियाणा जो पंजाब के कारखाने के नियमों का पालन करता है। राज्य ऐसे भी कई नियमों की अधिसूचना देते हैं जिन्हें राज्य में संचालित उद्योगों की प्रकृति, सुरक्षा अधिकारी, कर्मचारी कल्याण, मातृत्व लाभ और लागू विशेष प्रावधानों जैसी तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। किसी को भी कारखाने के लिए उपयुक्त विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए इन नियमों के बारे में परामर्श लेना चाहिए

 

विनिर्माण, भंडारण, जोखिम रसायनों संबंधी आयात अधिनियम, 1989 संशोधित 2000
यह अधिनियम जो कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत तैयार किया गया है, केवल उन कारखानों पर लागू होता है जो सीमा रेखा कही जाने वाली एक निर्दिष्ट सीमा से अधिक जोखिम रसायनों का भंडारण, प्रबंधन, आयात करते हैं। सीमा रेखा मात्राएं क्रमश: नियमों की अनुसूची 2 और 3 के कॉलम 3 में निर्दिष्ट हैं। यह नियम कारखाने में सुरक्षा जांच की आवश्यकता को भी निर्दिष्ट करता है। इस अधिनियम में 684 जोखिम युक्त रसायन निर्दिष्ट हैं

 

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948
इस अधिनियम में बीमारी, मातृत्व और 'काम के दौरान लगी चोट' के मामले में कर्मचारियों को निश्चित लाभ प्रदान करने और उसके संबंध में कुछ अन्य मामलों के लिए प्रावधान है। अधिनियम का खंड 52A व्यावसायिक रोगों से संबंधित है। तीसरी अनुसूची व्यावसायिक रोगों की एक लिस्ट प्रदान करती है

 

बिल्डिंग व अन्य निर्माण कर्मी (रोजगार का नियमन और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1996
यह अधिनियम बिल्डिंग और अन्य निर्माण कर्मियों को रोजगार और सेवा की शर्तों का नियमन करने और उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के उपाय प्रदान करने और इसके साथ या प्रासंगिक रूप से इस के अतिरिक्त जुड़े अन्य मामलों के लिए है। यह अधिनियम बिल्डिंग या निर्माण के उद्देश्य के लिए 50 या अधिक श्रमिकों को रोजगार देने से संबधित है

इस अधिनियम का अध्याय-7 श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा एवं स्वास्थ्य उपायों का प्रावधान करता है

 

सारांश
लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) से संबंधित कानून परिवर्तन की अवस्था में हैं। फिर भी, सुरक्षा उपायों को लागू करने का महत्व और कारखाने के सभी हितधारकों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह सब स्वस्थ्य कार्यबल और प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण थे, हैं, और रहेंगे, इसके परिणामस्वरूप उद्यमियों द्वारा किए गए निवेश पर दीर्घकालीन रिटर्न मिल पाएंगे