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SMEs के लिए ट्रेड रिसीवेबल डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDs) का परिचय

SME भारत की आर्थिक विकास को चलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देश की GDP के एक-तिहाई हिस्से में उनका योगदान होता है और इस काम में लाखों लोग कार्यरत होते हैं। फिर भी, वे अपने बिजनेस में कमर्शियल व संचालन संबंधी कई चुनौतियों का सामना करते हैं और कार्यक्षमता व लाभप्रदता बढ़ाने के लिए लगातार उचित तरीकों व साधनों की तलाश करते रहते हैं

कार्यशील पूंजी की कमी भारत में अधिकांश SME की मुख्य चिंताओं में से एक है। इस मामले में, समय पर बकाया राशि रिकवर न हो पाने से अत्यधिक लोकप्रिय उत्पादों और सेवाओं की पेशकश करने वाली लाभदायक कंपनियों के सामने भी गंभीर चुनौतियां हैं। ऐसे में प्राप्तियों की संभावनाओं के लिए ट्रेड रिसीवेबल डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDs) को अपनाना कई अवसरों के द्वार खोल सकता है

 

TReDs क्या है?

फाइनेंसिंग ट्रेड रिसीवेबल के लिए TReDs एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म है। यह चालान के साथ-साथ एक्सचेंज के बिल में डिस्काउंट की सुविधा भी देता है। इस सिस्टम में सीधे तौर पर तीन प्रतिभागी यानि SMEs (विक्रेता), कॉरपोरेट संस्थाएं (खरीदार) और फाइनेंसर शामिल होते हैं

TReDs सबके लिए एक खुला मैदान प्रदान करता है जहां सभी प्रतिभागी सदस्य मिलकर सुविधा, स्वीकार्यता, छूट, और चालान निपटान के लिए कार्य करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, केवल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs), विक्रेताओं के रूप में भाग लेते हैं, जबकि NBFCs, बैंक और फैक्टरिंग कंपनियां फाइनेंसर होती हैं

 

TReDs कैसे काम करता है?

चलो TReDs की कार्य प्रणाली को समझते हैं

चरण 1. विक्रेता चालान (1000 रुपये) अपलोड करते हैं

चरण 2. स्वीकृति के लिए चालान खरीदार को दिया जाता है

चरण 3. खरीदार चालान स्वीकार करता है

चरण 4. चालान की नीलामी प्रक्रिया आरंभ होती है

चरण 5. प्रत्येक फाइनेंसर डिस्काउंट की दर दर्ज करता है, उदाहरण के लिए रु.800 या रु.700 या कुछ और

चरण 6. ब्याज लागत वहन करने वाली पार्टी सबसे बेहतर बोली को स्वीकार करती है

चरण 7. फाइनेंसर के खाते को डेबिट किया जाता है और विक्रेता के खाते को क्रेडिट किया जाता है

 

डिस्काउंट दर

सभी पार्टियों के हितों की रक्षा के लिए कई नियम और दिशानिर्देश हैं। उदाहरण के लिए, फाइनेंसर RBI द्वारा निर्धारित फंड-आधारित लोन दर (MCLR) की सीमांत लागत से नीचे बोली नहीं लगा सकते हैं। यहां, क्रेडिट रेटिंग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आमतौर पर खरीदार अच्छे क्रेडिट रेटिंग का लाभ उठाते हुए MCLR दर के करीब बोली लगाएं

वर्तमान में, RBI-अनुमोदित दो ऑनलाइन मार्केट TReDs। इस प्रकार हैं

  • RXIL (भारत के पहले TReDs प्लेटफॉर्म को SIDBI द्वारा NSE और तीन बैंक (SBI, ICICI बैंक और YES बैंक) की साझेदारी में स्थापित किया गया और
  • A.TReDs(एक्सिस बैंक और एम-जंक्शन सेवा का एक संयुक्त उपक्रम)
 

SMEs के लिए लाभ

  • प्रतिस्पर्धी दर पर फाइनेंस की त्वरित उपलब्धता
  • फास्ट डिस्बर्सल तरलता सुनिश्चित करता है
  • TReDs पोर्टल पर झंझट-रहित और कागज रहित डॉक्यूमेंटेशन
  • नकदी के फ्लो और खरीदारों के अनुकूल समुचित संबंध
 

चुनौतियाँ

वर्तमान में, केवल कुछ NBFCs और बैंक को फाइनेंसर के रूप में अनुमति दी जाती है। बाजार का विस्तार करने, प्रतिस्पर्धा में सुधार करने और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए विशेषज्ञों ने हाई नेट-वर्थ वाले व्यक्तियों को भागीदारी का सुझाव दिया है। मुख्य धारा से जोड़े जाने के लिए अपने ग्राहक संबंधी नियमों को भी जानना चाहिए

कुल मिलाकर, TReDs की सहायता से SME की कार्यशील पूंजी को अनलॉक किया जा सकता है और उच्च दक्षता व पूंजी प्रबंधन को सुनिश्चित कर सकते हैं। इसी तरह, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से लागत-प्रभावी SME लोन और बिजनेस फाइनेंस के माध्यम से भारतीय SMEs की असली क्षमता को उभारने में मदद मिली है। अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें