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भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि 2016 से तीव्रतम हो सकती है

विश्व बैंक तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पूर्वानुमानों के अनुसार, दशक की शेष अवधि के दौरान भारत का विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहने की आशा है। अनुमान बताते हैं कि 2020 तक यह जर्मनी को पछाड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है, जो केवल अमेरिका, चीन और जापान से ही पीछे होगी। पिछले दो वर्षों के दौरान 7% से अधिक जीडीपी वृद्धि को देखते हुए यह कहना उचित होगा कि आने वाले समय में देश अभूतपूर्व आर्थिक वृद्धि के रास्ते पर बढ़ सकता है

अनेक लोगों को यह जानकर आश्चर्य हो सकता है, कि भारत की अर्थव्यवस्था की लगातार वृद्धि कायम रखने में योगदान करने वाले सबसे बड़े इंजन छोटे और मध्यम आकार के उपक्रम (एसएमई) ही हैं। भारत में लगभग 42.5 मिलियन एसएमई हैं, जो देश में कुल लगभग 40% रोजगार उपलब्ध कराते हैं, और भारत की जीडीपी में लगभग 17% का योगदान करते हैं। संक्षेप में, वे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ के समान हैं

 

संतुलित आर्थिक विकास

भारत की आर्थिक वृद्धि के सबसे शक्तिशाली प्रेरकों के रूप में एसएमई के उदय के अनेक महत्त्वपूर्ण कारण हैं। देश में संतुलित आर्थिक विकास को प्रोत्साहन, उनका सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान है। छोटे उद्योगों की तुलना में, जहां कि आर्थिक वृद्धि अधिक विस्तृत क्षेत्र तक दिखती है, बड़े उद्यमों का सुदूर क्षेत्रों तक प्रभाव बहुत ही सीमित है

एसएमई ने ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के औद्योगीकरण में सहायता की है, और इस तरह से क्षेत्रीय असंतुलनों को दूर किया है और राष्ट्रीय आय का अधिक समानतापूर्ण वितरण सुनिश्चित किया है। छोटे पैमाने के पंजीकृत उद्योगों में से, कुल में से 45% से अधिक उपक्रम ग्रामीण इलाकों में स्थित हैं। इससे न केवल देश के समग्र विकास में योगदान मिला है, बल्कि शहरी उद्योगों को भी सहायक उत्पादों की आपूर्ति मिलने में सहायता मिलती है

 

औद्योगिक विकास के साथ शहरीकरण का सामना

यह एक स्थापित तथ्य है, कि ग्रामीण भारत के शहरीकरण को रोका नहीं जा सकता। इसका सामना व्यवसायों की सफलता, तथा देश के सभी भागों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए ही किया जा सकता है। व्यावसायिक अवसरों को ऐसे दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाते हुए, या ग्रामवासियों के लिए उनके अपने ही इलाके में रोजगार पाने हेतु मोबाइल प्लेटफार्म उपलब्ध कराते हुए भारतीय एसएमई ने बड़ा काम किया है

अब तक, लगभग 65% जनसंख्या कृषि कार्य में लगी है। एसएमई ने कृषि उत्पादन, तथा लोगों के जीवनस्तर में सुधार के संदर्भों में असंख्य व्यावसायिक वृद्धि अवसरों की पहचान की है। उन्होंने ग्रामीण भारत में कई समस्याओं जैसे कि नकद धन की कमी, तकनीक का अभाव, तथा बाज़ार पहुंच, आदि के समाधान किए हैं। इन गतिशील परिवर्तनों ने देश को विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ने में सक्षम बनाया है

 

एसएमई द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियां

भारत में 40% रोजगार प्रदान करने, तथा विगत कुछ वर्षों के दौरान तीव्रता से प्रगति करने के बावजूद ये छोटे और मध्यम आकार के उपक्रम, कुछ विशेष प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। एसएमई के लिए पहली सबसे बड़ी बाधा, वित्तपोषण के रूप में सामने आती है। विविध क्षेत्रों की 15,000 से अधिक कंपनियों पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, ऐसा पाया गया कि ज्यादातर एसएमई, बैंकों द्वारा वसूली जाने वाली उच्च ब्याज दरों के कारण अपने व्यवसाय का वित्तपोषण कर पाने के मामले में पिछड़ते जा रहे हैं

हालांकि एसएमई को आसान और किफायती वित्त उपलब्ध कराने, के लिए सरकार द्वारा उठाए गए मुद्रा योजना जैसे कदमों, तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) द्वारा मदद का हाथ बढ़ाए जाने की वजह से परिस्थितियों में तेजी से सुधार हो रहा है। 2019 में भी इस स्थायी वृद्धि को जारी रखने के लिए भारत में एक अग्रणी एनबीएफसी के रूप में रिलायंस मनी भी युवा उद्यमियों को कम ब्याज दरों पर और लचीले पुनर्भुगतान विकल्पों के साथ आसान एसएमई ऋण प्रदान कर रहा है