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भारत में कौशल की कमी को दूर करने के लिए आईडिया

यह माना गया है कि यह कदम देश की आर्थिक प्रगति और साथ ही बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार के भी लिए बहुत जरूरी है। उनके पास वैश्विक विनिर्माण केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की सबसे अधिक क्षमता है। लेकिन फिर भी, वे मजबूर हैं

जबकि हर साल करीब 15 मिलियन कर्मचारी कार्यबल के रूप में शामिल होते हैं, जिनमें से लगभग 75% लोग नौकरी के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं। यह बड़ा असंतुलन टेक्निकल और सॉफ्ट स्किल की कमी के कारण, युवा स्नातकों की रोजगार प्राप्त करने की क्षमता में सुधार की तत्काल जरुरत को हाईलाइट करता है

वर्तमान में SME को कर्मचारियों की भर्ती , ट्रेनिंग, और मेंटरिंग के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके कुछ शुरुआती मुद्दे निम्न हैंः

  • कुशल श्रमशक्ति को खोजने में कठिनाई
  • अभ्यर्थी को प्रशिक्षित न कर पाना
  • कौशल असंतुलन के कारण निराशा और अक्षमता
  • लेबर यूनियन का हस्तक्षेप
  • न्यूनतम मजदूरी, जरूरी लाभ, और भत्तों से संबंधित स्क्यूड लेबर कानून

इस खाई को पाटने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं

 
  • शिक्षा प्रणाली का पुनर्मूल्यांकन

भारत में, व्यावसायिक शिक्षा को काफी हद तक एक डाउन कैरियर माना जाता है, जबकि यह उन लोगों के लिए बरदान साबित होता है जो कि औपचारिक शैक्षणिक प्रणाली में प्रगति करने में समर्थ नहीं होते हैं। इस धारणा को बदलने की जरूरत है। विभिन्न बिजनेस में अवसर के लिए व्यावसायिक शिक्षा की औपचारिक डिग्री की जरुरत होती है

हमें नौकरी से संबंधित कार्यक्रम में वृद्धि करने और प्रशिक्षुओं को लाभदायक अवसर प्रदान करने के लिए उद्योग और शिक्षा के बीच मजबूत संबंध की भी जरुरत होती है। इस तरह की संबद्धता यह सुनिश्चित करती है की छात्रों के पास जॉब-के लिए मौजूदा माहौल में सबसे महत्वपूर्ण है-स्किल और क्षमता के लिए सही तरीके से जोखिम और ट्रेनिंग की

टेक्निकल स्किल ट्रेनिंग के अतिरिक्त, इसमें सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग जैसे कम्युनिकेशन स्किल भी शामिल होने चाहिए

 
  • मानक मूल्यांकन करना

वर्षों से, एक मानक, राष्ट्रव्यापी कौशल आकलन और मान्यताप्राप्त पद्धति की जरुरत महसूस की जा रही है। आकलन और परीक्षण में अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करने वाला एक केंद्रीय कौशल विकास विश्वविद्यालय स्थापित करके हम एक विश्वसनीय, टिकाऊ, और मजबूत तंत्र स्थापित कर सकते हैं। इस तरह का कदम छात्रों (एक राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त डिग्री प्रदान करने के लिए) के लिए उपयोगी साबित होगा, और SME के लिए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता का निर्माण करेगा

 
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम

बहुत कम SME के पास अपने कर्मचारियों के लिए समग्र कौशल विकास की पेशकश करने के लिए संसाधन और साधन उपलब्ध होते हैं। यह संगठन के भीतर कौशल अंतर के कारण होता है जिससे प्रच्छन्न रोजगार या उच्च उन्मूलन होता है। इसका मुकाबला करने के लिए, एक सरकारी प्रोत्साहित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम को एकीकृत किया जा सकता है। कौशल प्रशिक्षण के अलावा यह रोजगारक्षमता बढ़ाने में भी मदद करेगी

कौशल अंतर की खाई को पाटने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी एक महत्वपूर्ण मॉडल है। वर्तमान सरकार, सेक्टर स्किल काउंसिल (SSC) और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन इंडिया (NSDC) ने उद्यमियों को कौशल शिक्षा प्रदान करने की पहल और उपक्रम बनाने जैसे कई अवसर प्रदान किए हैं

 
  • केंद्रीय रोजगार एक्सचेंज

श्रम बाजार असंगठित है और अधिकांश बिजनेस के लिए इसका उपयोग करना मुश्किल है। मानव संसाधनों के उपयोग के लिए एकीकृत राष्ट्रीय पोर्टल बिजनेस की पहचान और श्रमशक्ति की सेवा को आसान बना सकता है

वित्तीय वर्ष 1217-18 के बजट में, भारत सरकार ने इस क्षेत्र में स्किल इंडिया मिशन को बढ़ावा देने के लिए 17,000 करोड़ रुपये का अलग से आबंटन करने का निश्चय किया है। इसके अलावा, सरकार ने विदेशी भाषाओं में उन्नत पाठ्यक्रम आयोजित करने वाले 100 भारतीय अंतर्राष्ट्रीय स्किल केंद्र स्थापित करने का निश्चय किया है ताकि युवाओं को विदेशी नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके

शिक्षित होने के बावजूद भी बेरोजगारी देश के लाखों छात्रों के लिए आम कहानी है। हमारे देश में कौशल की कमी की तुलना में कौशल का बेमेल होना अधिक महत्वपूर्ण समस्या है। भारत में कौशल विकास में यह अंतर गहरी चिंता का विषय है और हमें विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए इसके बीच ताल-मेल बनाना होगा