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एनालिटिक्स से अपने शैक्षिक संस्थान को अधिक प्रभावशाली कैसे बनाएं?

वित्तीय सेवाएं, रिटेल, मीडिया और उत्पादन सेक्टरों के कारोबार और प्रचालन में तीव्र सुधार का श्रेय बिजनेस में डेटा एनालिटिक्स को जाता है, और शिक्षा क्षेत्र भी एनालिटिक्स की शक्ति का लाभ उठाकर शिक्षण परिणामों को बेहतर बना सकता है और प्रभावशीलता बढ़ा सकता है

आईबीईएफके मुताबिक, अपै्रल 2018 तक के अनुसार भारत में 850 विश्वविद्यालय संचालित हैं, और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र तीव्र वृद्धि के लिए तैयार है। डेटा पर आधारित हो चुकी दुनिया में, आइए देखें कि आप अपने शैक्षिक संस्थान को एनालिटिक्स के माध्यम से अधिक प्रभावकारी कैसे बना सकते हैं

 

छात्रों की ट्रैकिंग प्रगति

एक शिक्षाप्रदाता के रूप में, आपके पास छात्रों के बारे में बहुत सारी सूचनाएं होती हैं जो प्रवेश फॉर्म, सर्वेक्षण और एप्लिकेशन्स के माध्यम से एकत्रित की जाती हैं। इन सूचनाओं में अन्य के अलावा उनकी पिछली शैक्षिक गतिविधियां, लोकेशन, उपस्थिति, धर्म और अंकों आदि की जानकारी शामिल होती है

जहां आप इस जानकारी को अपने डेटाबेस में संग्रहीत कर सकते हैं, वहीं एनालिटिक्स से आपको उन्हें संकलित करने तथा छात्रों की प्रगति जांचने के लिए उनकी तुलना करने में मदद मिलेगी

 

सीखने के अनुभव को अनुकूलित बनाने की सुविधा

प्रत्येक छात्र कौशल या विषय चुनने और उसमें निपुणता प्राप्त करने के मामले में अलग होता है। जहां कुल छात्र इसे एक बार में कर सकते हैं, वहीं दूसरे थोड़ा समय ले सकते हैं। हालांकि, एनालिटिक्स के माध्यम से छात्रों के लिए शिक्षक एक अनुकूलित शिक्षण अनुभव तैयार कर सकते हैं, जो चीज़ों को समझने और सीखने की उनकी शैली पर आधारित होता है

छात्रों के प्रदर्शन को बारीकी से ट्रैक करने के बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर, शिक्षण सामग्री को समायोजित किया जा सकता है। इससे शिक्षकों को कठिनाई महसूस करने वाले छात्रों की पहचान करने और उन तक पहुँचने और उनकी सहायता करने के तरीके खोजने में मदद मिलेगी

 

कक्षा में रूचि बढ़ाना

कक्षा में रूचि, शिक्षण का एक अनिवार्य अंग है और पढ़ाए जाने वाले हर पाठ/की जाने वाली हर गतिविधि में भागीदारी हर एक छात्र के लिए महत्त्वपूर्ण है। पारंपरिक माहौल में जहां शिक्षक सवाल करता है, एक बार में केवल एक छात्र ही उत्तर दे सकता है

इंटरएक्टिव प्रतिक्रिया प्रणालियों के जरिए अनेक छात्र एक साथ उत्तर दे सकते हैं। रूचि रखने और न रखने वाले छात्रों का विश्लेषण व उनकी संख्या जानना आसान हो जाता है। इसलिए, कठिनाई महसूस करने वाले छात्रों की सहभागिता बढ़ाने के लिए ये स्टेप लागू किए जाते हैं, जिससे कक्षा में रूचि बढ़ती है

 

सीखने का घनिष्ठ माहौल बनाना

प्रायः कई परियोजनाओं पर अनेक छात्रों व शिक्षकों को मिलकर काम करना होता है। इसलिए, हर एक के लिए यह ज़रूरी है कि वह दूसरों से तालमेल रखे और उनके कार्यों से अवगत रहे। सीखने का स्मार्ट माहौल वो होता है जहां घनिष्ठता होती है, रीयल टाइम शेयरिंग होती है तथा ज्ञान और कुशलताओं का आदान-प्रदान किया जाता है

इससे छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद प्रभावी और घनिष्ठ बनता है, जिससे सीखना सिखाना अधिक बेहतर और घनिष्ठ बनता है

 

माता-पिता को बच्चे की प्रगति के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करना

शिक्षक अक्सर माता-पिता को मासिक या तिमाही रिपोर्ट भेजते हैं, जिससे उन्हें अपने बच्चों के प्रदर्शन के बारे में पता चलता है। हालांकि, आजकल माता-पिता अपने बच्चे की प्रगति के बारे में विशेष बातें जानना चाहते हैं जैसे किः

  • वह अपनी पढ़ाई में कितनी रूचि लेता हैं?
  • वह किन क्षेत्रों में अच्छा कर रहा है
  • उनके बच्चे को किन विषयों में कठिनाई होती है और मदद की जरूरत है

एनालिटिक्स के माध्यम से, आप एक शिक्षक के रूप में, किसी बच्चे के माता-पिता को उसकी प्रगति के बारे में पूरी जानकारी दे सकते हैं, जिससे उसकी सफलता के लिए उन्हें महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सहायता मिलती है

कुल मिलाकर, एनालिटिक्स लागू करना महंगा काम है। इसके संचालन और रखरखाव की लागत हर साल लाखों रूपये हो सकती है। हालांकि रिलायंस मनी से प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर व्यापारिक विस्तार हेतु लोन लेकर आप अपने संस्थान को आसानी से प्रभावशाली बना सकते हैं। इस बारे में अधिक जानने के लिए,यहां क्लिक करें