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क्लाइंट के छिपे पूर्वाग्रह से कैसे निबटें

छिपे पूर्वाग्रह, किसी घटना के हो जाने के बाद उसके अपरिहार्य होने का पूर्वानुमान करने की प्रवृत्ति होती है। यह 'ये तो मैं पहले से ही जानता था' वाला प्रभाव भी कहलाता है। उदाहरण के लिए, कोई निवेशक 10 वर्षों तक हर महीने एक बार यह सोच सकता है कि वित्तीय संकट आने वाला है। और जब बाज़ार में संकट खड़ा हो जाता है, तो वे महसूस करते हैं कि वे तो यह पहले से ही जानते थे। यह विश्वास, कि ऐसा होने के बारे में वे पहले से ही जानते थे, लोगों को अति-आत्मविश्वासी बनाता है और वे भावी घटनाओं को कुछ सटीकता से पूर्वानुमानित करने के लिए अपनी अंतर्दृष्टि या मंतव्यों को बढ़ा-चढ़ाकर अनुमानित करते हैं

छिपे पूर्वाग्रह, ठोस वित्तीय निर्णय लेने में भी बाधा डालते हैं क्योंकि सब कुछ जानने की अपनी क्षमता को लेकर व्यक्ति में अति-आत्मविश्वास होता है, जिससे वह अति-आत्मविश्वासी बन जाता है। प्रायः यह क्लाइंट और सलाहकार के आपसी संबंध को प्रभावित करता है। जब निर्णय के परिणाम अपेक्षा के अनुसार नहीं मिलते, तो प्रायः परिणामों का पूर्वानुमान करने के मामले में सलाहकार की अक्षमता पर दोषारोपण किया जाता है, जो क्लाइंट से संबंध खराब कर सकता है, और सलाहकार की क्षमताओं पर से उनका भरोसा उठ सकता है

निवेश के क्षेत्र में या शेयर बाज़ार में, किसी निश्चित समय बिंदु पर लिए गए किसी निर्णय के परिणामों का पूर्वानुमान कर पाना बिरले ही संभव होता है। निर्णय अच्छा है या बुरा, एक निश्चित अवधि या उसके प्रतिफलों के बाद ही इसका निर्धारण किया जा सकता है

यदि आपके क्लाइंट में छिपे पूर्वाग्रह हैं, तो ठोस निर्णय करने, तथा दीर्घकालीन संबंध सुदृढ़ बनाने के लिए निम्न सुझावों को अपनाने पर विचार करें

 

सतर्क रहें

छिपे पूर्वाग्रह के आधार पर निर्णय करने से रोकथाम की दिशा में पहला कदम इसकी मौजूदगी के प्रति सतर्क होने से है। सबसे परिपक्व और सबसे अनुभवी निवेशक भी यह प्राक्कलन या पूर्वानुमान नहीं कर सकते कि कोई विशेष निवेश, आगामी वर्षों में उचित साबित होगा कि नहीं। इसलिए, उचित निर्णयों में सहायता के लिए छिपे पूर्वाग्रहों के बजाय, निवेश पोर्टफोलियो के ठोस विश्लेषण और जोखिम व प्रतिफल संतुलन को ही अपने निर्णयों का आधार बनाएं

 

पिछली गलतियों से सीखें

छिपे पूर्वाग्रह निवेशकों को निवेश संबंधी उनके पिछले निर्णयों से सीख लेकर उनके पेशेवर ज्ञान को बेहतर बनाने से रोक देते हैं। निवेश पूर्वानुमानों और उनके औचित्यों का रिकार्ड रखने से छिपे पूर्वाग्रहों पर आधारित निर्णय लेने से रोकथाम हो सकती है। इसके अलावा, पिछले निवेश निर्णयों तथा उनकी परफार्मेंस का मूल्यांकन करने से वित्तीय सलाहकार अपने क्लाइंट्‌स को ठोस निवेश निर्णयों के संबंध में परामर्श दे सकते हैं। पिछले निवेश विकल्पों का विश्लेषण करके व उन अनुभवों से सीख लेकर निवेशकों को नए निर्णय करते समय अधिक स्पष्ट व संतुलित ढंग से सोचने में मदद मिलती है। सकारात्मक तथा ऋणात्मक चीज़ों पर संतुलित रूप से विचार करने से निवेशकों के निवेश निर्णयों पर अति-आत्मविश्वास का प्रभाव रोकने में मदद मिलती है

 

वित्तीय विशेषज्ञ से सहायता लें

प्रबंधित फंड में निवेश के लिए पेशेवर निवेश प्रबंध की सहायता लेना, बुद्धिमानी भरा कदम है। उनकी विशेषज्ञता और मार्गदर्शन, छिपे पूर्वाग्रहों पर आधारित निर्णयों की रोकथाम में मदद कर सकते हैं