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ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस भारतीय SMEs को वैश्विक स्तर पर ले जाने में किस प्रकार से मदद कर सकते हैं?

भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, छोटे और मध्यम उद्योग (SMEs) अपने बहुगामी प्रभावों के कारण बहुत अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं, ये न केवल नवीनतम आविष्कारों के द्वारा रोज़गार का सृजन करते हैं बल्कि अर्थव्यवस्था को स्थायित्व देने और बढ़ाने में भी मदद करते हैं। देश में ई-कॉमर्स क्षेत्र में आए उछाल के कारण SMEs का भविष्य संभावनाओं से परिपूर्ण है

दुनिया भर में, चीन और अमेरिका के बाद भारतीय इ कॉमर्स बाजार तीसरा सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। ऐसा माना जाता है कि नई विकसित होती टेक्नोलॉजी के लिए 2020 तक SME सेक्टर 25.8 बिलियन यूएस डॉलर का हो जाएगा। ऑनलाइन बाजार ने SMEs पर किस प्रकार से बड़ा प्रभाव डाला है और यह दुनिया भर से उनके लिए ग्राहक जुटाने में किस प्रकार से मददगार सिद्ध हुआ है यह जानने के लिए कृपया इस लेख को आगे पढ़ें

 

निर्यात करने योग्य उत्पादों के लिए बढ़ता बाजार

एक अनुमान के मुताबिक भारत में 48 मिलियन SMEs है, जो कुल औद्योगिक इकाइयों के 95% है, और जीडीपी में 45% तक का योगदान दे रहे हैं। देश में इस बड़े SME समूह में मुख्य भाग उन विक्रेताओं का है जो अपने उत्पादों का निर्यात करने के लिए दुनिया भर में ग्राहक तलाश रहे हैं, इस प्रक्रिया में वह ऑनलाइन बाजार से माल खरीदने के दौरान खुद भी उपभोक्ता बन जाते हैं

SMEs पारंपरिक विक्रेताओं के मुकाबले, ऑनलाइन व्यापार करके अपेक्षाकृत अधिक वैश्विक ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना पा रहे हैं। ये फर्म्स ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का प्रयोग कर औसतन 30 विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं तक अपनी पहुंच बना पा रही हैं। आने वाले समय में इन्हें बढ़ती ऑनलाइन ग्राहक मांग और ई कॉमर्स बाजार में बढ़ती संभावनाओं का लाभ भी मिल सकता है

 

बाजार के ट्रेंडस को समझें

भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, आज इस देश में 343 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ता है और यह आंकड़ा सीधे-सीधे देश में व्यापार की वृद्धि के साथ जुड़ा हुआ है। भारतीय SME अपने आप को बाजार में स्थापित करने के लिए ई-कॉमर्स मार्ग का सहारा ले रहे हैं और इसे एक प्रभावी मार्केटिंग टूल के रूप में प्रयोग कर रहे हैं

इसके अलावा, ऑनलाइन मार्केटिंग से उन्हें यह भी जानने में मदद मिलती है कि किसी विशेष उत्पाद की बाजार में मांग है कि नहीं। ऑनलाइन बाजार उनके उत्पादों को ग्राहकों की एक बड़ी संख्या के सामने लाने में मदद करते हैं, और इन्हीं ग्राहकों द्वारा प्राप्त सुझावों के माध्यम से ये व्यवसाय नये बिजनेस मॉडल तैयार कर सकते हैं

 

वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए बिजनेस इकोसिस्टम

ई-कॉमर्स मैं आई उछाल ने SMEs को सभी तकनीकी और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परेशानियों से मुक्त करते हुए एक ऐसा बिज़नेस वातावरण तैयार करके दिया है जिससे वह वैश्विक अर्थव्यवस्था में आसानी से अपनी भागीदारी सुनिश्चित करवा सकते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि आज बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है और निरंतर हो रहे तकनीकी परिवर्तनों के कारण चपलता और रणनीतिक संसाधनों की ओर बेहतर पहुंच आवश्यक हो गई है

भारत में, बहुत सी कंपनियों जैसे कि अमेज़न, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील ने अपने बहुत से सहयोगियों के माध्यम इसे क्षेत्र में पैर जमा लिए हैं और एक ऐसा सिस्टम विकसित कर दिया है जो आसानी से और दक्षता से कार्य करता है। यह सब बताना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज भी ऐसे बहुत से SME है जिन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यवसाय संभावनाओं और इस माध्यम से एक सस्टेनेबल बिजनेस इकोसिस्टम तैयार करने के बारे में जानकारी नहीं है

क्योंकि देश में नवीन आविष्कारों, रोज़गार और तकनीकी क्षेत्र में विकास लाने के लिए SME एक महत्वपूर्ण उपकरण सिद्ध हो सकते हैं इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि वह डिजिटलाइजेशन को अपनाएं जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ सके। ई-कॉमर्स बाजार के विकास ने भारतीय SMEs के लिए संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं और धीरे-धीरे इस क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आ रहा है

SMEs के इस विकास में अपना सहयोग देने के लिए रिलायंस मनी बिजनेस एक्सपान्सन लोन प्रदान करता है जिससे वे नवीनतम टूल्स और टेक्नोलॉजी को खरीद सकें और बढ़ते बाजार की जरूरतों के मुताबिक खुद को ढाल सके