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स्वच्छ ऊर्जा का संयुक्त दोहन: टीईकेआईसी की केस स्टडी<

कुमारी स्मृति जैन, मैनेजर,फाउंडेशन फॉर एमएसएमई (MSME) क्लस्टर्स

जलवायु परिवर्तन से निपटने और इसे संभालने के लिए सुधारात्मक डिजाइन, लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) द्वारा साफ-सुथरी प्रौद्योगिकियों का परिनियोजन आवश्यक है। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया वायु प्रदूषण या विषाक्त उप—उत्पादों के बिना बिजली उत्पन्न करने की प्रक्रिया से संबंधित होती है। ऐसी तकनीक के लाभ प्राप्त करने के लिए मानव को स्वच्छ और नवीकरणीय योग्य ऊर्जा को साथ—साथ वित्तीय संसाधनों के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है

उद्यमियों को परिसर में विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने और शहर से भीड़ को कम करने के लिए पहली निजी औद्योगिक भू—सम्पदा तिरूपुर निर्यात निटवियर औद्योगिक परिसर (टीईकेआईसी) को निजी औद्योगिक परिसर को बढ़ावा देने हेतु एक सोसायटी के रूप में 1999 में स्थापित किया गया था। टीईकेआईसी का प्रमुख उद्देश्य था

  • सदस्यों को स्वच्छ और नवीकरणीय योग्य ऊर्जा उपलब्ध कराना
  • प्रभावी रूप से नवीकरणीय योग्य ऊर्जा के प्रयोग द्वारा बिजली की लागत को कम करना

इसलिए, टीईकेआईसी के पदाधिकारियों ने सदस्य इकाईयों को निर्बाध, स्वच्छ और सस्ती बिजली की आपूर्ति प्रदान करने के लिए पवन चक्कियां स्थापित करने का निर्णय लिया

उद्देश्य को पूरा करने में निम्नलिखित गतिविधियां शामिल थीं

  • भूमि खरीद: 1999 में, टीईकेआईसी ने शहर से 8 किमी दूर 100 एकड़ भूमि खरीदी, और अत्याधुनिक मूलभूत सुविधाओं के साथ परिसर की स्थापना की. इस परिसर ने 189 सदस्यों को अंतर्निहित औद्योगिक शेड्स प्रदान किए हैं जो लगभग 10,000 श्रमिकों को रोज़गार प्रदान करते हैं.
  • • नवीकरणीय योग्य ऊर्जा का स्थापन: 2003 में, टीईकेआईसी ने तमिलनाडु में थिरूनेलवेली में एक उपयुक्त स्थान पर 0.50 प्रति मेगावॉट की 8 पवन चक्कियों को स्थापित किया, जहां वर्षभर हवा की गति अच्छी रहती है जिससे 4 मेगावॉट उत्पन्न करने द्वारा सदस्यों की बिजली की आवश्यकताओं के लगभग 40 प्रतिशत को पूरा किया जा सके.

  • नियामक स्वीकृति: आंतरिक वितरण व्यवस्था के माध्यम से बिजली प्रवाहित करने और सदस्यों को वितरण के लिए तमिलनाडु विद्युत बोर्ड (टीएनईबी) से अनुमति प्राप्त करने के लिए कदम उठाए गए थे.

इनकमिंग HT करंट के लिए बिजली घर, ट्रांसमिशन ह्रास में 5% तक की बचत करने हेतु भूमिगत केबल नेटवर्क और सदस्यों को विद्युत वितरित करने के लिए ट्रांसफॉमरों समेत कुल परियोजना लागत 27.33 करोड़ रुपए आंकी गई थी। कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार ने 12.25 करोड़ रुपए का अनुदान दिया, 189 सदस्यों ने 2.92 करोड़ रुपए का योगदान दिया और टीईकेआईसी ने इंडियन ओवरसीज़ बैंक और सिडबी से 12.16 करोड़ रुपए का सावधि लोन प्राप्त किया। 84 एकड़ की ज़मीन थिरूनेलवेली ज़िला के राधापुरम गांव में खरीदी गई

बाज़ार की कीमत का भुगतान करने के साथ ही, उस छोटे क्षेत्र को छोड़कर जहां पवन चक्की स्थापित थी, भूमि मालिकों को खुदाई की गतिविधियां जारी करने की अनुमति दी गई। परियोजना का कार्य मई 2004 में शुरू हुआ, पवन चक्कियां स्थापित हुईं और जून, 2006 में बिजली का उत्पादन शुरू हुआ

वर्तमान में, टीईकेआईसी अपने स्वयं की पवन ऊर्जा और खुले बाज़ार से खरीदकर सदस्यों की संपूर्ण बिजली की आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है। औसतन, एक सदस्य लगभग 6.04 रुपए प्रति यूनिट बचाता है, जो कि 3.9 लाख रुपए प्रति वर्ष है। टीईकेआईसी ने लोन के पुनर्भुगतान में चूक नहीं की है। एक बार पुनर्भुगतान पूरा हो जाने पर, बचत 5.6 लाख रुपए प्रति वर्ष तक बढ़ जाएगी। निर्यात के लिए निटवियर के निर्माताओं का नवीकरणीय योग्य स्रोत से स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा प्राप्त करना, वैश्विक तापवृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) रोकने के लिए एक सराहनीय प्रयास है। आज तक, टीईकेआईसी ने 6.83 करोड़ यूनिट की पवन ऊर्जा उत्पन्न की है जिसका मतलब है 37,000 टन से अधिक कोयला बचाया जा चुका है। सभी 189 इकाईयों द्वारा डीज़ल उत्पादन ढांचों के संचालन के कारण क्षेत्र में ध्वनि एवं वायु प्रदूषण पूरी तरह से समाप्त हो गया है