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सुश्री नीतू गोयल, सीनियर मैनेजर, फ़ाउंडेशन फ़ॉर एमएसएमई क्लस्टर्स (एफ़एमसी)(FMC)

सुश्री सुचिस्मिता नायक, मैनेजर, एफ़एमसी

बैकग्राऊंड
बारगढ़ उड़ीसा के उत्तर-पश्चिम भाग में एक जिला है जहां कृषि मुख्य गतिविधि है। बाँध की उपस्थिति के कारण यहां धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और इसे ‘उड़ीसा का धान का कटोरा’ कहा जाता है। इस कारण इस इलाके में राइस मिल्स मौजूद हैं। इस इलाके में मिलिंग का कार्य लगभग 60 साल पहले शुरू हुआ था। पहले इस क्लस्टर में 95 यूनिट थीं जिनकी स्थापित क्षमता 100 मिलियन टन चावल प्रतिवर्ष की थी। बाद में एफ़सीआई की ओर से खरीद सहयोग मिलने के कारण, 2001 से 2005 के दौरान यूनिटों की संख्या बढ़कर 150 हो गई। 2004-05 में कुल उत्पादन 0.5 मिलियन टन था और क्लस्टर का अनुमानित टर्नओवर 2005 में रु 10 अरब था

 

समस्या

बारगढ़ राइस मिल क्लस्टर की डाइग्नोस्टिक अध्ययन रिपोर्ट से पता चला कि सॉल्वेंट एक्सट्रेक्शन प्लांट और टैस्टिंग लैब के लिए एक साझा सुविधा केंद्र (सीएफ़सी) विकसित करने की आवश्यकता है. एक आकलन से ज्ञात हुआ कि एक टन चावल उत्पादन से 0.17 टन भूसी उत्पन्न होती है. 2005 में क्लस्टर में कुल भूसी उत्पादन 85,000 टन था. भूसी को स्थानीय स्तर पर रु 15,000 प्रति टन की दर से बेच दिया जाता था. श्री पीताम्बर परिदा, असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ़ इंडस्ट्रीज़, ओडिशा (भूतपूर्व क्लस्टर डेवलपमेंट एक्जीक्यूटिव) ने भूसी की उपयोगिता के बारे में जागरुकता फैलाई. भूसी से भूसी का तेल (ब्रान ऑइल) निकाला जा सकता है.

 

प्रक्रिया

अधिकारी ने संघ सदस्यों के साथ कचरे को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करने की संभावना और उसके लाभ की चर्चा की। तेल निकालने और जांच सुविधा के लिए प्लांट और मशीनों की अनुमानित लागत रु 38 मिलियन थी जिसे किसी अकेले एमएसएमई के लिए वहन करना मुश्किल था। इसलिए, संघ ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम मंत्रालय (एमओएमएसएमई) की एमएसई-सीडीपी योजना के तहत आवेदन किया और एमओएमएसएमई के तत्वावधान में तथा राज्य सरकार की सहायता से बारगढ़ राइस मिलिंग कन्सोर्टियम (बीआरएमसी) का गठन किया। सीएफ़सी में टैस्टिंग और सॉल्वेंट एक्सट्रेक्शन जैसी सुविधाएं शामिल थीं। परियोजना की कुल लागत रु 55.6 मिलियन थी जिसमें एसपीवी सदस्यों ने रु 31.494 मिलियन का योगदान किया और केंद्र सरकार ने रु 24.495 मिलियन का योगदान किया।वर्ष 2010 में 150 टन प्रतिदिन (टीपीडी) की क्षमता वाले एक्सट्रेक्शन प्लांट के साथ सीएफ़सी की स्थापना की गई

 
चित्र 2 सीएफसी में निष्कर्षण सुविधा

सीएफ़सी के लाभ:
सीएफ़सी 2014 में स्थापित किया गया था और तब से इस इलाके के राइस मिलर्स को कई लाभ मिले हैं जैसे:

  1. चावल की भूसी की कीमत:सीएफ़सी में भूसी के उपयोग के कारण चावल की भूसी की कीमत 30% से भी अधिक बढ़ गई है.
  2. अपव्यय की रोकथाम:चावल की भूसी जल्द खराब होती है अतः यह बारिश के मौसम में खाने योग्य नहीं रह जाती है. सीएफ़सी के होने से इस अपव्यय की रोकथाम हुई है क्योंकि भूसी को उत्पादन वाले दिन ही प्रसंस्कृत कर लिया जाता है.
  3. मोलभाव की शक्ति में वृद्धि: सीएफ़सी की स्थापना से पहले, अधिकांश राइस मिलर्स भूसी को राज्य से बाहर बेचने पर विवश थे, आमतौर पर इसके कारण कीमतों के भुगतान/समझौते पर विवाद होते थे. पर अब उन्हें अपने उत्पाद की सही कीमत मिलती है और यह इलाका अब क्रेता बाजार (आपूर्ति अधिक, मांग कम) से बदलकर विक्रेता बाजार (आपूर्ति कम, मांग अधिक) बन गया है.

 

प्रभाव
  1. यूनिटों की संख्या में वृद्धि:चावल की भूसी की कीमत बढ़ने से यूनिटों की समग्र वित्तीय व्यवहार्यता बेहतर हुई है, जिससे यूनिटों की संख्या बढ़ते हुए 2016 में 102 पर पहुंच गई है जो 2005 में 95 पर थी.
  2. रोज़गार: सीएफ़सी ने मैनेजर, मशीन ऑपरेटर, कर्मी आदि के रूप में उक्त गतिविधियों में 100 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोज़गार का अवसर उत्पन्न किया है.
  3. टर्नओवर: राइस मिलिंग यूनिटें पहले स्थानीय स्तर पर रु 15,000 प्रति टन की दर से चावल की भूसी बेच रही थीं, पर अब वे रु 21,000 प्रति टन की दर से उसे बेच रही हैं जिससे क्लस्टर के टर्नओवर में 20-25% की वृद्धि हुई है.
  4. एक्सपोर्ट: कन्सोर्टियम ने तेलमुक्त चावल की भूसी के लिए संभावनाएं ढूंढने के उद्देश्य से निर्यात लाइसेंस के लिए आवेदन किया है.

लीडर्स की कलम से

श्री रोहित गिंघल, मैनेजिंग डायरेक्टर, राजीब लोचन राइस मिल

 

जब मैंने मेरा राइस मिल व्यापार शुरू किया था तो कुल उत्पादन 5 टन प्रति घंटा था. मिलिंग प्रक्रिया में मेरी यूनिट में इस उत्पादन से 0.8 टन भूसी निकलती थी. उसे स्थानीय व्यापारी को रु 15,000 प्रति टन की दर से बेच दिया जाता था. साझा सुविधा केंद्र स्थापित होने के बाद भूसी को रु 21,000 प्रति टन की दर से बेचा जाता है. सीएफ़सी से दोहरा लाभ है, (a) कचरे का उपयोग होता है (b) आय में वृद्धि हुई है