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कुमारी स्मृति जैन, मैनेजर,फाउंडेशन फॉर एमएसएमई (MSME) क्लस्टर्स

पृष्ठभूमि
प्लास्टिक उद्योग रोज़मर्रा की तमाम चीजों की ज़रूरतें पूरी करता है और जीवन के लगभग हर क्षेत्र, जैसे कपड़े, आवास, निर्माण, फ़र्नीचर, ऑटोमोबाइल, घरेलू वस्तुएँ, कृषि, उद्यान कृषि, सिंचाई, पैकेजिंग, मेडिकल उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल सामानों आदि में फैला हुआ है, जैसा कि नीचे चित्र 1 से स्पष्ट है। चित्र दर्शाता है कि प्लास्टिक का सबसे अधिक उपभोग पैकेजिंग में होता है

 

ऊर्जा उपभोग के क्षेत्र
प्लास्टिक उद्योगों में 3 ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं जहाँ ऊर्जा का इस्तेमाल होता है। वे हैं सेवाएँ, प्रोसेसिंग और साइट

  • सेवाओं में कम्प्रेस्ड एयर, कूलिंग और चिल्ड वॉटर, मटीरियल हैंडलिंग, री-ग्राइन्डर्स, लाइटिंग, हीटिंग, कूलिंग/वेन्टिलेशन आदि शामिल हैं.
  • प्रोसेसिंग में इंजेक्शन मोल्डिंग मशीनें, एक्स्ट्रूडर, ब्लो मोल्डिंग मशीनें आदि शामिल हैं.
  • साइट में व्यवस्थापकीय कार्य जैसे ऑफ़िस, कम्प्यूटर मॉनिटर, प्रिन्टर आदि शामिल हैं.
 

भारतीय प्लास्टिक उद्योगों में ऊर्जा का उपयोग

प्लास्टिक उद्योग में ऊर्जा केवल लाइटिंग तक सीमित नहीं है। उत्पादन प्रक्रियाएँ भी ऊर्जा का इस्तेमाल करती हैं, जिनमें कम्प्रेसर, चिलर, पॉलिमर प्रोसेसिंग, वॉटर पम्प, ऑफ़िस और हीटिंग में इसका इस्तेमाल होता है। ग्राफ 2 दर्शाता है कि प्लास्टिक उद्योगों में ऊर्जा का सबसे अधिक उपभोग पॉलिमर प्रोसेसिंग में होता है, जिसके बाद चिलर और कम्प्रेसर का स्थान है।.

ऊर्जा संरक्षण के लिए जो सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रथाएँ अपनाई जा सकती हैं वे इस प्रकार हैं

  • लाइटिंग:अधिक आउटपुट वाले एलईडी या फ़्लोरेसेंट लैम्प उच्च तीव्रता वाले डिस्चार्ज लैम्पों का एक अच्छा विकल्प हैं क्योंकि वे 50% कम ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं, बेहतर रंग वाली और अधिक छितरी हुई रोशनी देते हैं, जिससे वे अधिक आरामदायक तथा ऊर्जा कुशल बन जाते हैं.

  • वेरिएबल स्पीड ड्राइवर्स (वीएसडी): मोटर चालित सिस्टम अक्सर आवश्यकता से बड़े आकार के और अकुशल नियंत्रण वाले होते हैं. वीएसडी से पंखे, पम्प या कम्प्रेसर की स्पीड को प्रक्रिया की आवश्यकताओं के अनुरूप बदल कर स्रोत पर ही प्रवाह या दबाव घटाने की एक अधिक किफ़ायती विधि मिल जाती है. वीएसडी के उपयोग से आमतौर पर 20 से 50% ऊर्जा की बचत होती है.

  • कम्प्रेस्ड एयर: कम्प्रेस्ड एयर सिस्टमों में आपूर्ति में सुधार करके और माँग घटाकर ऊर्जा की बचत की जा सकती है. आपूर्ति वाली ओर, नए उपकरण स्थापित करके या मौजू़दा उपकरणों को ऑप्टिमाइज़ करके तथा सिस्टम प्रेशर घटा कर बचत की जा सकती है.

  • प्रोसेस कूलिंग: प्रोसेस कूलिंग को ऑप्टिमाइज़ करने से कूलिंग की लागत घट सकती है. इसमें चिलर्स की स्टेजिंग की जाती है, कन्डेन्सर वॉटर का तापमान घटाया जाता है और वेरिएबल फ़्रीक्वेंसी ड्राइवर्स (वीएफ़डी) तथा नियंत्रणों के इस्तेमाल के जरिए पम्पिंग कुशलता बढ़ाई जाती है.

  • प्रोसेस हीटिंग:एक्स्ट्रूडर पर बाहरी बैरेल और डाई को इंसुलेट करने से ऊर्जा की बचत में मदद मिलेगी. इसके अतिरिक्त, प्रोसेस हीटिंग में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल में ऊर्जा की बचत के लिए आमतौर पर सबसे अधिक तकनीकी व आर्थिक संभावना मौजूद है.

  • इलेक्ट्रिक-इंजेक्शन मोल्डिंग मशीनें:एक्स्ट्रूडर पर बाहरी बैरेल और डाई को इंसुलेट करने से ऊर्जा की बचत में मदद मिलेगी. इसके अतिरिक्त, प्रोसेस हीटिंग में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल में ऊर्जा की बचत के लिए आमतौर पर सबसे अधिक तकनीकी व आर्थिक संभावना मौजूद है.

  • कम्प्रेस्ड एयर की रिकवरी: इस एयर को रिकवर करने के लिए मौजूदा इंजेक्शन मोल्डिंग मशीनों को रेट्रोफ़िट किया जा सकता है और उनका इस्तेमाल कम प्रेशर वाले कम्प्रेस्ड एयर सिस्टम में किया जा सकता है. इस उपाय से कम प्रेशर वाले कम्प्रेस्ड एयर सिस्टम पर लोड बहुत घट जाता है जिससे ऊर्जा की अच्छी-ख़ासी बचत हो सकती है.

  • रेडियन बैरेल हीटर बैंड: इसकी स्थापना सरल है, इसके लिए कम श्रम-शक्ति चाहिए और यह ऊर्जा कुशल होता है.