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ऊर्जा लागतें बढ़ रही हैं और ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि वे भविष्ट में घटेंगी। ऊर्जा प्रबंधन से मिलने वाला लाभ, बिक्री बढ़ाने से मिलने वाले लाभ से कहीं अधिक आकर्षक है। ऊर्जा प्रबंधन के लिए मापन और प्रक्रिया की समझ, दोनों आवश्यक हैं

हम विद्युत ऊर्जा संरक्षण की सबसे आम अनुशंसाएं प्रस्तुत कर रहे हैं जो किसी आम प्लास्टिक प्रसंस्करण इकाई में लागू हो सकती हैं एवं लागू की जा सकती हैं

 

विद्युत पॉवर फ़ैक्टर (शक्ति गुणक) में सुधार

इस क्षेत्र में औसत पॉवर फ़ैक्टर 0.89 - 0.95 होने का आकलन है जिसे औद्योगिक मानकों की दृष्टि में कम माना जाता है। एसी परिपथ में पॉवर फ़ैक्टर एक महत्वपूर्ण विचारणीय पहलू हो सकता है, क्योंकि पॉवर फ़ैक्टर के एक से कम होने का अर्थ यह है कि परिपथ की वायरिंग को, प्रतिरोधी लोड को (वास्तविक) शक्ति की समान मात्रा पहुंचाने के लिए शून्य प्रतिघात वाले परिपथ में जितनी विद्युतधारा आवश्यक होती उससे अधिक विद्युतधारा ले जानी पड़ रही है। अतः लाइन के पार्श्व क्रम में केपेसिटर जोड़कर पॉवर फ़ैक्टर सुधारा जा सकता है। पॉवर फ़ैक्टर के कारण पड़ने वाला दंड कुल बिलिंग का 8-12% होने का आकलन है। उपयुक्त केपेसिटर जोड़कर, प्रभारित राशि को घटाकर शून्य किया जा सकता है। पेबैक अवधि लगभग 5-7 महीने होगी

 

ऊर्जा-अकुशल मोटर बदलें

ऐसा पाया गया है कि किसी आम मोटर की औसत धारा प्रचालन कुशलता 78% होती है। यह कम कुशलता कई इकाइयों की इस प्रथा के कारण है कि मोटर के जल जाने पर वे उच्च कुशलता वाली मोटर खरीदने की बजाए उसी मोटर की वाइंडिंग दोबारा करवा लेते हैं। हालांकि, दोबारा वाइंड की गई मोटर आमतौर पर नई मोटर से कम कुशल होती है। कुशलता की यह हानि खराब हो गई मोटर की आयु और खराबी के दौरान उसके स्टेटर कोर को पहुंचे नुकसान के कारण, या फिर दोबारा वाइंड करने की प्रक्रिया के कारण होती है। हर बार दोबारा वाइंडिंग कराने पर कुशलता में 1% से 5% की हानि होती है

 

वेरिएबल फ़्रीक्वेंसी ड्राइव्स (वीएफ़डी) की स्थापना (VFD)

कई औद्योगिक परिवेशों में, वेरिएबल स्पीड कंट्रोल का उपयोग किफ़ायती सिद्ध होता है। मोटरों द्वारा ऊर्जा उपभोग घटने से ऊर्जा की बचत होती है। चूंकि सिस्टम की विद्युत आवश्यकता घट जाती है, अतः उपकरण द्वारा उपभुक्त विद्युत की मात्रा में भी इतनी कमी हो जाती है जिसे मौजूदा नियंत्रणों के जरिए हासिल नहीं किया जा सकता था। उदाहरण के लिए, पंपों के मामले में, प्रवाह का नियंत्रण (थ्रॉटलिंग) प्रायः वॉल्वों द्वारा किया जाता है, जिससे पंप हेड बढ़ता है और प्रवाह दर घटती है। प्लास्टिक उद्योग में, इंजेक्शन और ब्लो मोल्डिंग मोटरों, पंपों और कंप्रेसरों पर वीएफ़डी लगाए जा सकते हैं। एक आकलन के अनुसार, यदि ऐसे नियंत्रक अपना लिए जाएं तो मोटर की विद्युत ऊर्जा में 15-20% की बचत हासिल हो सकती है। औसत बचत 17.5% मानकर चलें तो, पेबैक अवधि औसतन लगभग 9-12 महीने होगी

 

कंप्रेस्ड एयर के रिसाव की मरम्मत

कंप्रेस्ड एयर के रिसाव से बेकार हुई हवा को वायुमंडलीय दाब से कंप्रेस करके कंप्रेसर के प्रचालन दाब तक लाने में खर्च हुई ऊर्जा लागत, इस प्रकार के रिसावों की लागत होती है। बेकार हुई हवा की मात्रा लाइन दाब, रिसाव बिंदु पर कंप्रेस्ड एयर के तापमान, कंप्रेसर इनलेट पर हवा के तापमान, और रिसाव के आकलित क्षेत्रफल पर निर्भर करती है। रिसाव क्षेत्र का पता आमतौर पर रिसाव से होने वाली आवाज और वायु प्रवाह के एहसास द्वारा लगता है। हवा के रिसाव के कारण हुई कुल हानि ज्ञात करने की एक वैकल्पिक विधि में सभी वायु प्रचालित उपकरणों के बंद होने के दौरान कंप्रेसर चक्रों के बीच का समय मापा जाता है। एक आकलन के अनुसार, यदि हवा के रिसाव खत्म कर दिए जाएं तो कंप्रेसर की विद्युत ऊर्जा में 15-20% की बचत हासिल हो सकती है। औसत बचत 17.5% मान लें। सामान्यतः इसके कार्यान्वयन में अग्रांकित में से एक या दो चीजें शामिल होती हैं : कपलिंग और/या होज़ बदलना, फ़िल्टरों पर लगी सील बदलना, लंच या ब्रेक अवधि के दौरान वायु प्रवाह बंद कर देना, और लाइनों में टूट-फूट/ब्रेक्स की मरम्मत करना आदि। पे बैक अवधि लगभग 10-20 दिन होगी

 

कंप्रेस्ड एयर के उपयोग की खराब कार्यप्रथाओं से बचना

साइट पर, कंप्रेस्ड एयर के उपयोग की कई खराब कार्यप्रथाएं देखी गई हैं। उदाहरण के लिए : कई कंपनियां एक्सट्रूडेड पाइप या मोटर आदि कुछ यंत्रों को ठंडा करने के लिए कंप्रेस्ड एयर का उपयोग करती हैं, वहीं कुछ अन्य कंपनियां सफाई के लिए इसे प्रयोग करती हैं। चूंकि कंप्रेस्ड एयर का उपयोग चीजों को ठंडा करने या सफाई करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, अतः इन उद्देश्यों के लिए उचित प्रवाह दर वाली वायु ही पर्याप्त है। इसके लिए ब्लोअर्स का उपयोग किया जा सकता है जो अपेक्षाकृत काफी कम ऊर्जा खर्चते हैं। एक आकलन के अनुसार, ऐसी खराब कार्यप्रथाएं छोड़ने से कंप्रेसर की विद्युत ऊर्जा में 10-20% की बचत हासिल हो सकती है। कार्यान्वयन की लागतों में कंप्रेस्ड एयर का स्थान लेने के लिए ब्लोअर्स की खरीद करना शामिल है। पेबैक अवधि लगभग 1-2 महीने होगी

 

एक्स्ट्रूज़न, इंजेक्शन, और ब्लो मोल्डिंग मशीन हीटरों का इंसुलेशन

साइट पर यह पाया गया कि एक्स्ट्रूज़न, इंजेक्शन और ब्लो मोल्डिंग मशीनों के कुछ हिस्से अच्छी तरह इंसुलेटेड नहीं थे। इससे ऊष्मा हानि होती है जिससे संबद्ध ऊर्जा लागत बढ़ती है। ऊष्मा हानियों के इन क्षेत्रों का अध्ययन किया जाना आवश्यक है। आकलन के अनुसार, ऊर्जा की बचत हीटरों की कुल इनपुट विद्युत का 10-14% है। कार्यान्वयन लागतों में श्रम लागत के साथ-साथ इंसुलेशन मटीरियल की खरीद शामिल है, और इसकी पेबैक अवधि लगभग 1-2 महीने है

 

भवन

प्लास्टिक प्रसंस्करण में भवन ऊर्जा लागतें कुल ऊर्जा लागतों का उल्लेखनीय प्रतिशत अंश सदैव नहीं होतीं, और किसी आम साइट पर वे कुल ऊर्जा लागतों का 7-8% होती हैं। इसके बावजूद, लगभग हमेशा ही सबसे पहले इन पर ही विचार किया जाता है, और भवन ऊर्जा कुशलता में सुधार लाने से लागतें घटाने, स्टाफ़ की आरामदेही बढ़ाने और कार्य आउटपुट सुधारने में मदद मिल सकती है

 

लाइटिंग

किसी आम प्लास्टिक प्रसंस्करण इकाई में लाइटिंग में प्रयुक्त ऊर्जा, कुल ऊर्जा खपत का लगभग 5% होती है। लाइटिंग को ‘परिवेशी’ और ‘कार्य’ लाइटिंग में बाँटा जा सकता है - इन दोनों में काफी अंतर है। परिवेशी लाइटिंग सुरक्षित आवागमन के लिए होती है, कार्य लाइटिंग किसी कार्य विशेष को पूरा करने के लिए होती है। लाइटिंग के स्तर काफी अलग-अलग होते हैं, इस बात को समझने और उन्हें अलग करने के लिए कदम उठाने से लागतें घटाई जा सकती हैं

लाइटिंग ऊर्जा का उपयोग घटाने में ‘लाइटिंग मैप’ बहुत महत्वपूर्ण होता है। सुधार क्षेत्रों की पहचान के लिए साइट की लाइटों, स्विचों और नियंत्रणों का मैप बनाएं

पुरानी तकनीक की लाइटें हटा कर एलईडी लाइटें लगाने और बुद्धिमान नियंत्रक जैसे सेंसर, टाइमर और पुश स्विच लगाने में निवेश करने से लाइटिंग की लागत स्वतः घट जाती हैं और उत्पाद या लाइटिंग की गुणवत्ता पर असर भी नहीं होता है