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उद्योग की संक्षिप्त प्रोफाइल

विकासशील देशों में आर्थिक अवसरों को प्रोत्साहित करने और नौकरियां पैदा करने के मामले में महिला उद्यमिता में शक्तिशाली संभावनाएं मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, यह बताने वाले प्रमाण बढ़ रहे हैं कि महिलाओं को आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने से परिवारों और समुदायों के स्वास्थ्य तथा कुशलक्षेम के लिए उल्लेखनीय लाभ प्राप्त हो सकते हैं (विश्व बैंक 2011)। भारत भी महिला उद्यमिता विकास पर उल्लेखनीय ज़ोर देता आ रहा है। शताब्दी की शुरूआत से ही, बढ़ते औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण के कारण भारत में महिलाओं की स्थिति बदल रही है। शिक्षा और जागरुकता के प्रसार के साथ, महिलाओं ने विस्तारित रसोई, हस्तशिल्प और पारंपरिक कुटीर उद्योगों से बाहर निकल कर अपारंपरिक गतिविधियों में अपना कौशल दिखाना शुरू कर दिया है

 

बीएमओ की पृष्ठभूमि

महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के एक विशेष अभियान में, एसोसिएशन ऑफ़ लेडी आंत्रप्रेन्योर्स ऑफ़ इंडिया (अलीप) के एक उपक्रम, सेंटर फ़ॉर आंत्रप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (सीईडी) की स्थापना वर्ष 1997 में एक पृथक सोसायटी के रूप में की गई थी। इसने उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देने की दिशा में नियोजित गतिविधियों के 18 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह उभरते हुए उद्यमियों को व्यापारिक करियर बनाने की दिशा में मदद देता है। सीईडी ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों में सैकड़ों कार्यक्रम संचालित किए हैं, जिनमें से कई केवल महिलाओं के लिए हैं

 

ज़िम्मेदार व्यापारिक गतिविधियों की उत्पत्ति

वर्ष 2012 से, सीईडी के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों में बुनियादी बदलाव हुआ है, जिसमें महिला उद्यमिता विकास पर तथा प्रशिक्षित महिलाओं को उभरती हुई उद्यमी बनने में मार्गदर्शन व सहयोग देने पर पूरा फ़ोकस किया जा रहा है। ये कार्यक्रम बुनियादी तौर पर विशिष्ट क्षेत्रों जैसे खाद्य प्रसंस्करण, रत्न एवं आभूषण, सत्कार, मशरूम की खेती आदि में टेक्नोलॉजी आधारित उद्यमिता विकास; और कौशल आधारित उद्यमिता विकास कार्यक्रमों जैसे फ़ैशन डिजाइनिंग एवं परिधान निर्माण, कॉस्मेटोलॉजी एवं ब्यूटीशियन, आर्टिफ़िशियल जूलरी की डिजाइनिंग और निर्माण, कांच पर स्क्रीन प्रिंटिंग और हैंड पेंटिंग, जूट के उत्पाद आदि में श्रेणीबद्ध किए गए हैं

 

फ़ंडिंग सहयोग

इनमें से अधिकांश कार्यक्रम केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं बैंकों द्वारा प्रायोजित हैं, वहीं इनमें से कुछ शुल्क-आधारित कार्यक्रम हैं जिनमें सीईडी नाममात्र का शुल्क ले रहा है। प्रायोजक मंत्रालय एवं संगठन इस प्रकार हैं : नेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज़ (सूक्ष्म, लघु व मध्यम उपक्रम मंत्रालय, भारत सरकार का संगठन); कृषि मंत्रालय, भारत सरकार; खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार; डीसी, हस्तशिल्प, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार; इत्यादि। कई बैंक जैसे एसबीआई, एसबीएच, आंध्र बैंक आदि भी ऐसे कई कार्यक्रम प्रायोजित कर रहे हैं

सीईडी एसीएबीसी कार्यक्रम (एग्री क्लीनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर्स) पुरुषो व महिलाओं, दोनों के लिए संचालित करता आ रहा है जो नेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर एग्रिकल्चर एंड एक्सटेंशन मैनेजमेंट (एमएएनएजीई), कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित है। अब उनके द्वारा केवल महिलाओं के लिए इसी शीर्षक से तीन कार्यक्रम अनुमोदित किए जा चुके हैं। हर कार्यक्रम का बैच आकार 30 होगा, प्रत्येक की अवधि दो माह की होगी, तथा आवास एवं भोजन निःशुल्क होगा

 

कार्यान्वयन और निर्वहनियता

कार्यक्रमों का निष्पादन निम्नांकित 5 चरणों में किया जाता है

चरण 1. विभिन्न क्षेत्रों में कौशलों की मांग तथा स्टार-अप आरंभ करने की संभावनाओं की पहचान करना

चरण 2. विभिन्न प्रायोजक मंत्रालयों / सरकारी एजेंसियों को प्रस्ताव भेजना

चरण 3. प्रशिक्षण असाइनमेंट्स प्राप्त करना

चरण 4. कार्यक्रमों की योजना बनाना और उन्हें कार्यान्वित करना

Step5. परामर्श  एवं  मार्गदर्शन व सहयोग

टेक्नोलॉजी, वित्त, आईटी आदि क्षेत्रों में आवश्यक विशेषज्ञता को तकनीकी संस्थानों, परामर्शदाताओं और निजी विशेषज्ञों से आउटसोर्स किया गया है। सलाह सेवाएं बीएमओ सदस्यों द्वारा दी जा रही हैं। इनमें से अधिकांश कार्यक्रम केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, जैसे सूक्ष्म, लघु व मध्यम उपक्रम मंत्रालय एवं विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एनएसटीईडीबी) द्वारा एवं बैंकों द्वारा प्रायोजित हैं, वहीं इनमें से कुछ शुल्क-आधारित कार्यक्रम हैं जिनमें सीईडी नाममात्र का शुल्क ले रहा है

वर्ष 2012 से 2015 की समाप्ति तक, सीईडी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विभिन्न स्थानों पर विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों को कवर करते हुए 24 कार्यक्रम संचालित कर चुका है। बिना किसी व्यवधान के गतिविधि को जारी रखने के लिए न तो प्रतिभागियों की कमी है और न संसाधनों की

 

लाभार्थी और लाभ

वर्ष 2012 से 2015 तक, बीएमओ ने 675 महिलाओं को उद्यमी बनने का प्रशिक्षण दिया है। अधिकांश कार्यक्रम निःशुल्क प्रदान किए गए हैं जो कि महिलाओं के लिए एक प्रमुख वित्तीय लाभ है

एक महिला उद्यमी का केस अध्ययन

46 वर्षीया सुश्री विजय लक्ष्मी आईटी पृष्ठभूमि से हैं और पहले मध्य पूर्व में कार्य करती थीं। उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के दौरान ब्रेक लिया, पर उनके बड़े हो जाने के बाद उन्होंने खुद का व्यापार शुरू करने का निर्णय किया। उन्होंने वर्ष 2013 में हमारे जनरल ईडीपी में से एक में भाग लिया और फिर सितंबर 2014 में उन्होंने अलीप इंडस्ट्रियल एस्टेट, प्रगतिनगर में केसरी फ़ूड्स नामक उपक्रम स्थापित करके कुकीज़ के व्यापार में कदम रखा। प्लांट और मशीनरी में उनका कुल निवेश रु 30 लाख था और इससे 10 व्यक्तियों को रोज़गार मिल रहा है। विभिन्न व्यापार विचारों के साथ सोच-विचार करते हुए उन्होंने देखा कि बाजार में कुकीज और बिस्कुट की बड़ी बिक्री होती है, और वे बिना ब्रांड के तथा खराब गुणवत्ता के होते हैं। वे कहती हैं कि उन्होंने गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया है। उनकी कुकीज़ की एक अन्य विशेषता यह है कि वे पूरी तरह अंडाहीन हैं। आज तक वे हैदराबाद और सिकंदराबाद में तथा आस-पास के कस्बों में अपने उत्पादों की सफलतापूर्वक मार्केटिंग कर रही हैं। अब वे अपनी कुकीज़ का निर्यात करने की योजना बना रही हैं