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लोन फंस गया है? यह रही थोड़ी सी मदद

डूबते लोन की बढ़ती संख्या वित्तीय संस्थानों और अर्थव्यवस्था, दोनों पर बोझ डालती आ रही है। इस समस्या की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि भारत सरकार को हालात संभालने के लिए पिछले साल बैंकों में रु 2.11 लाख करोड़ की पूंजी फिर से डालने की योजना घोषित करनी पड़ी थी

हाल ही में सामने आए हाई-प्रोफाइल धोखाधड़ी के मामलों ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि हमारा सिस्टम इस खतरे से निपटने लायक मजबूत है या नहीं। 2019 के आम चुनाव आने को हैं, तो यहां हम आपको कुछ तरीके बता रहे हैं जिनसे हालात को आसानी से संभाला जा सकता है

 

1. डिफॉल्टर के साथ हालात पर बात करें

डिफॉल्टर (लोन चुकाने में चूक करने वाले व्यक्तियों) में यह विश्वास आम होता है कि वित्तीय संस्थान उनका उत्पीड़न करेंगे, जिससे हालात और पेचीदा हो जाते हैं। ऐसे हालात में दोनों पक्षों के हित में यही है कि वे आमने-सामने बैठकर मामले पर बात करें। अचानक नौकरी चली जाना, कोई मेडिकल एमरजेंसी आ जाना या कारोबार में घाटा हो जाना व्यक्ति के माली मामलों पर तनाव डाल सकते हैं, जिस कारण वह लोन चुकाने में चूक कर सकता है

अगर वजह असली है, तो हालात को थोड़ा ढील देने से मामला आसान होता है और डिफॉल्टर का डर शांत होता है। आमने-सामने बैठकर बात करने का उद्देश्य एक ऐसा बीच का रास्ता निकालना होता है जिससे दोनों पक्षों को फ़ायदा हो। कठोर शब्दों वाला पत्र या ईमेल भेजने की बजाय, आपको उधार लेने वाले व्यक्ति को एक साफ-साफ बातचीत के लिए बुलाना चाहिए

 

2. लोन के नियम और शर्तें दोबारा तय करें

डूबते लोन से निपटने का एक समझदारी भरा तरीका यह होता है कि लोन के नियम और शर्तें दोबारा तय की जाएं। मसलन, अगर डिफॉल्टर की वजह सही है, और वह बकाया रकम चुकाने की हालत में नहीं है, तो लोन के नियमों और शर्तों में थोड़ी फेर-बदल कर देने से बेहद मुनासिब नतीजे हासिल हो सकते हैं

जैसे, डिफॉल्टर को थोड़ी राहत की सांस देने के लिए लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है, या ब्याज की दर घटाई जा सकती है। साथ ही, डिफॉल्टर अपने माली मामलों की गाड़ी फिर से पटरी पर ला सके इसमें उसकी मदद करने के लिए, मोरेटोरियम अवधि, यानि वह अवधि जिस दौरान उधार लेने वाले व्यक्ति को कोई चुकौती नहीं करनी होती है, बढ़ाई जा सकती है। अक्सर लोन के नियम और शर्तें फिर से तय कर देने पर, डिफॉल्टर को बकाया रकम चुकाने के लिए वह समय मिल जाता है जिसकी उसे बेहद ज़रूरत होती है

 

3. लोन मंजूरी की प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी शामिल करें

अगर वित्तीय संस्थान लोन मंजूर करने की प्रक्रिया के दौरान संभावित डिफॉल्टरों की पहचान कर सकें, तो इस समस्या को सर उठाने से पहले ही कुचला जा सकता है। आर्टिफ़िशियल इन्टेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी टेक्नोलॉजी को शामिल करके ऐसा किया जा सकता है। ये दोनों ही टेक्नोलॉजी देश में उधार देने के कारोबार में तेजी हासिल कर रही हैं

इन टेक्नोलॉजी से व्यक्ति के खर्च करने के पैटर्न की और सामाजिक सयानेपन की गहरी जानकारी मिलती है, जिससे उधार देने वालों को जोखिम का बेहतर आकलन करने में मदद मिलती है। बहुत सी टेक्नोलॉजी फर्म ये सेवाएं दे रही हैं और वित्तीय संस्थानों के लिए बेहतर यही है कि वे लोन मंजूरी की प्रक्रिया में इनकी पेशेवर मदद हासिल करें

डूबते लोन की वसूली में बहुत समय खपता है। कई लोग यह सुझाव भी देते हैं कि उधार लेने वाले व्यक्ति ने जो ज़मानत रखी है उसे बेच दिया जाए, पर यह रास्ता आदर्श नहीं है क्योंकि इसमें कई महीन बुनियादी बातें शामिल होती हैं। साथ-ही-साथ, डिफॉल्टर की संपत्ति का खरीददार ढूंढना भी मुश्किल हो सकता है