ताजा अपडेट के लिए सब्सक्राइब करें

Text to Identify Refresh CAPTCHA कैप्चा रीफ्रेश करें

*साइन-अप करके मैं रिलायंस मनी से ई-मेल प्राप्त करने के लिए सहमत हूं

अभिजीत दास, बीई (इलेक.)

रबर/प्लास्टिक उद्योगों के कन्सल्टिंग इंजीनियर

निर्माण सेक्टर में जारी आज की गला-काट प्रतिस्पर्धा में, प्रचालन लागत घटाना स्पष्ट रूप से अनिवार्य हो चला है। रबर उद्योग भी इस मामले में पूरी दुनिया में महत्वपूर्ण घटनाक्रम घटित होते देख रही है। उनमें से कुछ के बारे में हम यहाँ पढ़ेंगे

 
  1. अच्छे इन-प्रोसेस टेस्टिंग सिस्टम यह पक्का करते हैं कि निर्माण शृंखला में डब्ल्यूआईपी, वांछित स्पेसिफ़िकेशनों से आगे न जाए, जिससे कचरे/रद्दी और रीसायक्लिंग की लागत में बचत हो. इसके लिए शॉप-फ़्लोर पर ऐसा अच्छा क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की ज़रूरत होती है जो सर्वोत्तम कार्यप्रथाएँ सुनिश्चित करता हो. टीक्यूएम, काइज़ेन या सिक्स सिग्मा कार्यप्रथाएँ न्यूनतम दोष सृजन हासिल करने के लिए सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी हैं. टेन्साइल टेस्टर, हार्डनेस टेस्टर, एब्रेज़न टेस्टर, रिओमीटर, विस्कोमीटर, फ़्लेक्स टेस्टर और एजिंग अवन आदि रबर उद्योग की आम टेस्टिंग मशीनें हैं.

  2. शॉप-फ़्लोर पर किसी पदार्थ की बर्बादी या आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल न हो यह पक्का करने के लिए प्रक्रियाओं को नियंत्रण में रखना स्पष्ट रूप से आवश्यक है.
    1. सभी सूक्ष्म रसायनों को स्पष्ट रूप से चिह्नित स्थानों में उचित प्रकार से भंडारित करना होता है, ताकि कोई बिख़राव एवं पैकेजिंग सामग्री का घिसना या टूट-फूट न हो.
    2. बैच निर्माण के दौरान कच्चे माल के घटकों की हैंडलिंग ऊँचे उठे प्लेटफ़ॉर्मों पर, विशाल ट्रे में की जानी चाहिए ताकि कार्य विशेष के बाद बची-खुची मात्रा वापस प्राप्त हो सके और उसका दोबारा इस्तेमाल हो सके.
    3. सभी मिक्सिंग एरिया जैसे नीडर/ओपन मिल आदि में हाउस-कीपिंग और स्वच्छता ठीक से बनाए रखनी चाहिए. ओपन मिल के नीचे की अंडर ट्रे का रखरखाव ठीक से करना चाहिए ताकि सभी बचे-खुचे क्रम्ब कम्पाउन्ड वापस हासिल किए जा सकें.
    4. मिक्सिंग एरिया फ़्लोर में स्वीपिंग कम्पाउन्ड को वापस हासिल करना चाहिए और नए बैचों में छोटी-छोटी मात्रा में मिला देना चाहिए ताकि उनका भी इस्तेमाल हो सके.
    5. पॉलिमर की प्रकृति के अनुसार स्प्यू (उगलन) और फ़्लैश रीसायक्लिंग टेक्नोलॉजी सुपरिभाषित होनी चाहिए, ताकि संपूर्ण फ़्लैश को छोटी-छोटी मात्राओं में नए बैचों में शामिल करने के द्वारा सिस्टम में रीसायकिल किया जा सके.

  3. निपटान की समस्या सुलझाने के लिए स्क्रैप रबर की रीक्लेमिंग (पुनः प्राप्ति) सबसे वांछनीय पद्धति है. वल्कनीकृत संरचना को ऊष्मा, रसायन और यांत्रिक तकनीकों के उपयोग द्वारा तोड़कर, वल्कनीकृत रबर के दानों से रीक्लेम का उत्पादन किया जाता है. रीक्लेम की सुघट्यता (प्लास्टिसिटी) किसी नए, अवल्कनीकृत रबर कम्पाउन्ड जैसी ही होती है, हालांकि उसका अणु भार घट चुका होता है, इसलिए रीक्लेम कम्पाउन्ड के भौतिक गुणधर्म नई रबर जितने अच्छे नहीं होते हैं. उनके उपयोग के मुख्य कारण कीमत, और रबर कम्पाउन्ड की प्रोसेसिंग में सुधार हैं. प्रोसेसिंग के मामले में प्राप्त हो सकने वाले मुख्य लाभ इस प्रकार हैं: - मिलाने में कम समय - ऊर्जा के उपभोग में कमी - ऊष्मा कम निकलना - एक्स्ट्रूडर और कैलेंडर पर अधिक तेज प्रोसेसिंग - अवल्कनीकृत कम्पाउन्ड का डाई स्वैल कम - कम्पाउन्ड की अधिक तेज क्योरिंग.
    • पुनः प्राप्त (रिकवर्ड) रबर की लागत प्राकृतिक या संश्लेषित रबर की तुलना में आधी हो सकती है.
    • पुनः प्राप्त रबर के कुछ गुणधर्म, नई रबर से भी बेहतर होते हैं. हालांकि वह दोहरे वल्कनीकरण से गुज़रती है, पर छोटे आकार वाले दानों से बेहतर पृष्ठ क्षेत्रफल सुनिश्चित होता है, जिससे जनक पदार्थ (पेरेंट मटीरियल) के साथ बेहतर आबंधन (बांडिंग) होता है. आदर्श रूप से, अक्रिय फ़िलर लोडेड कम्पाउन्ड के लिए हम नए पदार्थ के साथ 35% तक, और रीएन्फ़ोर्स्ड फ़िलर लोडेड कम्पाउन्ड के लिए 15% तक रीसायकिल्ड रबर का उपयोग कर सकते हैं.
    • रीक्लेम से रबर के उत्पादन की संपूर्ण उत्पादन प्रक्रिया में नए पदार्थ की तुलना में कम ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है.

  4. प्रत्येक रबर उद्योग को आर्थिक व्यवहार्यता के लिए अपनी विद्युत ऊर्जा एवं ईंधन ऊर्जा लागत की समीक्षा करनी ही होती है :
    • पिछले वर्ष के विद्युत बिलों, कांट्रेक्ट डिमांड, पॉवर फ़ैक्टर, लोड फ़ैक्टर, मशीनों की नो लोड हानियों की समीक्षा,जिसमें कैपेसिटर बैंकों, एसी लाइन रिएक्टरों, वेरिएबल फ़्रीक्वेंसी ड्राइवों आदि की स्थापना के द्वारा कांट्रेक्ट डिमांड में और कमी करने तथा पॉवर फ़ैक्टर में और सुधार लाने की संभावनाओं की छानबीन की जाएगी. दिन के अलग-अलग समय विद्युत यूनिट की अलग-अलग लागतों का लाभ उठाने के लिए टीओडी मीटर लगाना.
    • मोटर और पम्प लोडिंग का अध्ययन :वोल्टेज (V), करंट (I), पॉवर (kW) और पॉवर फ़ैक्टर के मापन की दृष्टि से मोटरों का अध्ययन करना और उसके द्वारा, ऊर्जा बचत के सुझाव देना जैसे मोटरों के आकार में कमी करना या मौजूदा मोटरों में ऊर्जा की बचत करने वाले यंत्र लगाना. तापमान बढ़ने के साथ वोल्टेज असंतुलन का अध्ययन करने, मोटरों का नो लोड अध्ययन करने, और रेटिंग का उचित चयन करने से ऊर्जा की बचत होगी. पम्पों और उनके प्रवाह का अध्ययन करके ऊर्जा की बचत के उपाय सुझाना, जैसे मोटरों व पम्पों के आकार में कमी करना या मौजूदा मोटरों में ऊर्जा की बचत करने वाले यंत्र लगाना / पम्पों का ऑप्टिमाइज़ेशन करना. इम्पेलर, बेयरिंग, सील, लुब्रिकेशन और अलाइनमेंट के उचित रखरखाव मानकों; घिसाव की निगरानी और कंपन का विश्लेषण करने, थ्रॉटलिंग हानियों को घटाने, दाब/प्रवाह की निगरानी करने; हेड (दाबोच्चता) घटाने, उचित आकार के पाइप प्रयोग करने आदि से उल्लेखनीय बचत होती है.
    • पॉवर ट्रांसमिशन सिस्टमों में सुधार और वेरिएबल फ़्रीक्वेंसी ड्राइव्स शामिल करके एन्क्लोज़्ड चैम्बर और ओपन मिल मिक्सर में ऊर्जा की बचत.
    • सही ऊष्मा सृजन एवं स्थानांतरण टेक्नोलॉजी के उपयोगद्वारा वल्कनाइज़र में ऊर्जा की बचत.
    • बॉइलरों का प्रदर्शन मूल्यांकन:इसमें बॉइलर दक्षता का विस्तृत अध्ययन, थर्मल इंसुलेशन का सर्वे और फ़्लू गैस का विश्लेषण शामिल होता है. कन्डन्सेट रिकवरी, पपड़ियाँ हटाने, बॉइलर ब्लोडाउन हीट रिकवरी से ऊर्जा की बचत सुनिश्चित होगी.
    • एयर कम्प्रेसर के प्रदर्शन का मूल्यांकनइसमें एयर कम्प्रेसर सिस्टम का प्रदर्शन और विशिष्ट ऊर्जा उपभोग ज्ञात करने के लिए उसका विस्तृत अध्ययन शामिल होता है. रिसाव रोकना, लाइन में सही ग्रेडिएंट सुनिश्चित करने के लिए उचित रखरखाव करना, कन्डन्सेट हटाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कन्डन्सेट ड्रेन ट्रैप्स लगाना, इनलेट हवा का तापमान घटाना, सही ड्रायर का चुनाव करना, हीट रिकवरी यूनिट आदि.
    • कन्डेन्सर के प्रदर्शन का मूल्यांकनइसमें कन्डेन्सर के प्रदर्शन का विस्तृत अध्ययन और बेकार जा रही ऊर्जा को पुनः प्राप्त करने के अवसरों का अध्ययन शामिल होता है.
    • प्रकाश व्यवस्थाविभिन्न स्थानों में प्रकाश व्यवस्था का, प्रकाश की तीव्रता (लक्स स्तर) का, एरिया लाइटिंग आदि का अध्ययन करना और जहाँ कहीं भी व्यावहारिक हो वहाँ सुधार के एवं ऊर्जा संरक्षण के उपाय सुझाना.
    • पंखों में ब्लेड के उचित अलाइनमेंट सेउल्लेखनीय बचत होती है.
    • डीजी सेटडीजी सेट्स की विद्युत उत्पादन की औसत लागत एवं विशिष्ट ऊर्जा उत्पादन का मूल्यांकन करने के लिए उनके प्रचालन का अध्ययन करना और फिर ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना जहाँ डीजी सेट की प्रचालन कार्यप्रथाओं आदि का विश्लेषण करने के बाद ऊर्जा की बचत की जा सकती हो.