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उद्योग की संक्षिप्त प्रोफाइल: लुधियाना पंजाब में औद्योगिक विकास का केंद्र है। यहां कपास और ऊनी कपड़ों की बुनाई का मजबूत सेक्टर है और यह ऐसे हजारों एमएसएमई का घर है जो सूती और ऊनी बुने वस्त्र बना रहे हैं और दशकों से ऊनी बुने वस्त्रों के क्षेत्र में शीर्ष स्थान कायम रखे हुए हैं। लुधियाना, साइकिल और साइकिल के पुर्जों, डीजल इंजनों और अन्य इंजीनियरिंग उत्पादों जैसे फासनर्स, मशीन टूल्स और जनरल मशीनरी, हैंड टूल्स, ऑटो पार्ट्स, बुनाई और सिलाई मशीन तथा खाद्य उत्पादों का भी प्रमुख उत्पादक है

 

बीएमओ की पृष्ठभूमि : चैंबर ऑफ कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल अंडरटेकिंग (सीआईसूयी) नामक एक उद्योग संघ का प्रवर्तन वर्ष 1968 में किया गया था एवं वर्ष 1972 में एक सोसायटी के रूप में इसका पंजीयन हुआ। उद्योग व ट्रेड से इसमें 1000 से भी अधिक सदस्य हैं। नियमित गतिविधियों जैसे सेमिनार और वर्कशॉप आयोजित करना और राज्य के अग्रणी बीएमओ के रूप में प्रभावी पक्षसमर्थन करना, के अलावा यह विशाल जॉब मेले, क्रेता-विक्रेता सभाएं, विदेशों में ट्रेड फेयर में सहभागिता, बी2बी सभाएं आदि भी आयोजित करता आ रहा है। इसने विभिन्न ईडीपी, मेंटरिंग और प्लांट के दौरों तथा अनुषंगी उपक्रमों को बढ़ावा देने हेतु विशाल स्तर के उपक्रमों से जुड़ाव के जरिए युवाओं को उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से यंग बिजनेस लीडर्स फोरम (वायबीएलएफ) का भी गठन किया है

 

ज़िम्मेदार व्यापार गतिविधि का विकास करना : लंबे समय से, लुधियाना से गुजरने वाली बुड्ढा नाला नहर विभिन्न स्थानों से इसमें नगरीय और औद्योगिक, दोनों प्रकार का कचरा डाले जाने के कारण अत्यधिक प्रदूषित है। उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित जल को नहर में डाले जाने के पीछे के मुख्य कारणों में से एक यह था कि प्रोसेसिंग की लागत घटाने के लिए प्रदूषित जल को कॉमन एफ्ल्युएन्ट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) में भेजने की बजाए उसे नहर में डाला जा रहा था। बुड्ढा नाला सबसे पहले तो लुधियाना से 20 किमी दूर सतलुज नदी में प्रवेश करके उसे प्रदूषित करती है, फिर व्यास नदी को और हरि-के-पट्टन पर दोनों नदियों के संगम को भी

 

यह अत्यधिक प्रदूषित जल आगे चलकर पंजाब और राजस्थान के इलाकों में कृषि और पीने के उद्देश्य से प्रयोग में लाया जाता है। इससे कृषि को गंभीर क्षति होती है और इस जलस्रोत के समीप रहने वाले जनसमूह के लिए स्वच्छ पेयजल अनुपलब्ध हो जाता है

 

सीआईसीयू औद्योगिक और घरेलू प्रदूषण से पर्यावरण को हो रही हानि के प्रति चिंतित थी, अतः उसने उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित जल को बुड्ढा नाला में डालने से रोकने के लिए ठोस प्रयास करने का निर्णय लिया

 

कार्यान्वयन और निर्वहनियता : सीआईसीयू ने बुड्ढा नाला के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव उपाय करने के अधिदेश के साथ एक ‘ग्रीन कमेटी’ गठित की। उद्योग व ट्रेड लीडर, आम जनता और पर्यावरण विशेषज्ञ कमेटी के सदस्य थे। वे हर शनिवार को मिलते थे और बुड्ढा नाला को प्रदूषण से बचाने के लिए शुरू की गई पहलों की निगरानी एवं मार्गदर्शन करते थे। उठाए गए कदम इस प्रकार थे

  • लुधियाना में उद्योगों द्वारा बुड्ढा नाला को प्रदूषित करने के विनाशकारी परिणाम दर्शाने के लिए एक वीडियो प्रस्तुति बनाई गई.
  • उद्योगों द्वारा पर्यावरण को पहुंचाई जा रही हानि और इस जलस्रोत का उपयोग करने वाले स्थानीय समुदाय पर इसके हानिकारक प्रभाव के बारे में जागरुकता का प्रसार करने के उद्देश्य से इस वीडियो को लुधियाना व आस-पास के क्षेत्र में विभिन्न औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपक्रमों व संगठनों तथा आम जनता के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
  • अक्टूबर 2012 से, प्रदूषित नदी के हानिकारक प्रभावों के बारे में उद्योगों में जागरुकता के प्रसार के उद्देश्य से हर 1-1.5 महीने में नियमित सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं.
  • सरफेस कोटिंग उद्योग भारी धातुओं का एक प्रमुख प्रदूषक है, इस उद्योग के फोरमेन, प्लांट ऑपरेटरों के लिए 3 प्रशिक्षण सत्र संचालित किए जा चुके हैं.
 

 

लाभार्थी और लाभ : ग्रीन कमेटी के इस सघन अभियान के परिणामस्वरूप, अधिकांश उद्योग अब अपने प्रदूषित जल को सीईटीपीएस भेज रहे हैं जिससे नाले में गिरने वाले प्रदूषित जल में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके वास्तविक लाभार्थी लुधियाना से आगे पड़ने वाले सतलुज और व्यास नदियों के क्षेत्रों के कृषक और आम लोग हैं