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सावधान! कारों से जुड़ी यह भ्रांतियां आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है

 

हम में से अधिकतर लोग कार चलाना जानते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कारों के बारे में सब कुछ जानते हैं। मार्केट में कारों से जुड़ी बहुत सी भ्रांतियां व्याप्त है। कुछ भ्रांतियां पुरानी हो चुकी है, कुछ को नासमझी का नतीजा माना जाता है, लेकिन एक या दो भ्रांतियां ऐसी है जो खतरनाक है। सिर्फ आप को जागरूक करने के उद्देश्य से मैं यहां कारों से संबंधित उन पांच भ्रान्तियों का वर्णन कर रहा हूं, जो आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है

 

आमतौर पर यह माना जाता है कि आपकी कार के लिए एडिटिव सप्लीमेंट के समान होते हैं और यह आपके वाहन की दक्षता को बढ़ा देते हैं:-आइल एडिटिव रासायनिक यौगिक होते हैं जो बेस आइल और उसकी क्षमताओं को बढ़ा देते हैं। अधिकतर मामलों में इनसे परफ़ोरमेंस बढ़ जाती है, इंजिन ऑयल की उम्र बढ़ जाती है और फॉमिंग कम हो जाती है, इसके अलावा और भी कई फायदे हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल करना कोई जरूरी नहीं है। सबसे पहला कारण है इनकी कीमत। क्वालिटी पर ध्यान देते देते हो सकता है कि आपके पास पैसे कम पड़ जाये। दूसरा, एडिटिव के अधिक इस्तेमाल से विपरीत प्रभाव भी हो सकता है। ये केटेलिटिक कनवर्टर को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं, घर्षण घटा सकते हैं और फॉमिंग का कारण बन सकते हैं। आइल एडिटिव मात्र एक सप्लीमेंट की तरह होते हैं और अगर आप अपनी वाहन में यह नहीं डालते हैं तो वाहन की दक्षता किसी भी प्रकार से कम नहीं हो जाती है

 

हाई ओक्टेन वाला पेट्रोल हमेशा अच्छा होता है – बात जब इंजन की धक्कों के प्रति प्रतिरोध की होती है तो ईंधन की ओक्टेन रेटिंग का महत्व होता है। लेकिन क्या यह वास्तव में आपकी कार के लिये इतना जरूरी है, या फ़िर मार्केटिंग का एक तरीका मात्र है? हाई ओक्टेन पेट्रोल इंजन में नोक रोकता है, इग्निशन का समय बढाता है और कंप्रेशन रेश्यो बेहतर करता है। लेकिन फ़िर भी, आपके वाहन में ईंधन के रूप में हाई ओक्टेन वाला पेट्रोल जरूरी नहीं है। हर इंजन का काम करने का तरीका अलग अलग होता है, इस कारण इंजन की जरूरतें भी अलग होती है। अगर आपकी कार को निम्न कंट्रोल पेट्रोल की जरूरत है तो ओक्टेन के इस्तेमाल से कोई खास फ़र्क नहीं पड़ने वाला। आपको यही सलाह दी जाती है कि सुझाये गये फ़्यूल ग्रेड का ही इस्तेमाल करें

 

वारंटी एक्सपायर होने के बाद भी ओटो वारंटी और रूटीन मेंटेनेंस हमेशा अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर (एडी) से ही करवानी चाहिए - हर चीज को मेंटेनेंस की जरूरत पड़ती है। यह सिस्टम के लिए खाने के जैसा काम करता है। आपके वाहन के लिए भी रूटीन चेकअप करवाना बहुत जरूरी होता है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि कार की वारंटी एक्सपायर हो जाने के बाद भी आप अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर से ही सर्विस करवाएं। आप अपना मैकेनिक चुन सकते हैं या फिर साधारण निरीक्षण खुद ही कर सकते है। आप कौनसी सर्विस चाहते हैं और किस से चाहते हैं यह पूरी तरह से आपका निर्णय होना चाहिये। बस इस बात का ध्यान रखिए कि सर्विस अच्छी गुणवत्ता वाली हो और आप उससे बिल लेना न भूलें

 

आपका इंश्योरेंस आपके लिए सब कुछ कवर करता है:- गलत। हालांकि कार खरीदते समय कार का इंश्योरेंस लेना जरूरी होता है, पर हर वाहन में इसका कवरेज अलग-अलग होता है। अतः, इन सब मार्केटिंग तकनीकों के जाल में ना फंसे। वाहन के इंश्योरेंस को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: फ़र्स्ट पार्टी इंश्योरेंस व थर्ड पार्टी इंश्योरेंस। साधारण वाहन इंश्योरेंस आपके वाहन को हुई क्षति और उसके कारण किसी के शरीर को हुई क्षति को कवर करता है। रिस्क मैनेजमेंट करने के लिए और सही इंश्योरेंस चुनने के लिए आपको या तो खुद रिसर्च करना चाहिए या फ़िर किसी विशेषज्ञ की सलाह ले लेनी चाहिये

 

आप को सालों तक एक ही कार इंश्योरेंस प्रदाता पर निर्भर रहना चाहिए:- बिल्कुल नहीं। इंश्योरेंस प्रदाता को चुनने का निर्णय पूरी तरह से आपका होना चाहिए। अपनी तसल्ली को प्राथमिकता दे। यह तो अपेक्षित है ही कि हर किसी कि खर्चे एक जैसे नहीं होते और आप अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी अपनी वहन करने की क्षमता के आधार पर चुन सकते है। आपको सिर्फ इसलिए उसी कंपनी का इंश्योरेंस नहीं सुनना है कि आपने पहले से उसका इंश्योरेंस ले रखा है। आपको उस कंपनी के बारे में सोचना चाहिए जो अच्छी सेवा प्रदान कर रही है। लेकिन नया इंश्योरेंस लेने से पहले पुराना इंश्योरेंस कैंसिल करवाना ना भूलें

 

निष्कर्ष

अब, इस वर्णन से यह तो स्पष्ट हो ही गया है कि आप अपनी कार पर वास्तव में कितना खर्च करते हैं। तो अफवाहों पर ध्यान न दें और अपना खुद का निर्णय ले। अपना खुद का रिसर्च करना हमेशा सही रहता है। यह न केवल आप को जागरुक बनाता है बल्कि आप को वास्तविक स्थिति का ज्ञान भी करवाता है