रिलायंस मनी के बारे में

तेजी से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था में, प्रत्येक व्यक्ति ने त्वरित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. लेकिन राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में अपने प्रशंसनीय योगदान के बावजूद, उनमें से अधिकतर धन के औपचारिक स्रोतों तक नहीं पहुंच पाए हैं. हम यहां हर उस व्यक्ति की वृद्धि को सक्षम बनाते हैं जो देश के विकास में योगदान देता है.

हमने हर छोटे व मध्यम उद्यम (SME) और रिटेल उपभोक्ता को उनकी वास्तविक क्षमता का एहसास कराकर उन्हें आत्मनिर्भर संस्था बनने में सहयोग प्रदान करते हुए भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है. पिछले 9 वर्षों से, हमारे कस्टमाइज्ड और सुविधाजनक वित्तीय समाधानों के माध्यम से, हमने देश भर के 4,00,000 से अधिक MSME को रु. 88,000 करोड़ का लोन देकर उन्हें उनकी सफलता की कहानी लिखने में मदद की है.

अपने ग्राहकों को सशक्त बनाकर और उनके व्यावसायिक सपनों को पूरा करके हम भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना चाहते हैं.

रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के मूल सिद्धांतों को बरकरार रखते हुए, हम ब्रांड को एक नया नाम दे रहें हैं जिससे हमारे विस्तृत रेंज वाले वित्तीय समाधान के महत्व में वृद्धि होगी और ग्राहकों की वित्तीय जरूरतें पूरी होंगी.

रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस अब बन गया है रिलायंस मनी.

 

बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स

कंपनी के ग़ैर-कार्यकारी निदेशक रविंद्र रावके पास बैंकिंग और वित्तीय सेवा उद्योग में 22 सालों का अनुभव है. वे कंज़्यूमर लेंडिंग व्यापारों के विभिन्न विभागों में कार्य कर चुके हैं जहाँ उन्होंने जोख़िम प्रबंधन, अनुपालन, वितरण, प्रचालन और प्रौद्योगिकी का प्रबंधन किया है. रिलाइंस ग्रुप से जुड़ने से पहले वे फ़ुलरटन इंडिया में थे जहाँ उन्होंने छः वर्ष कार्य किया था; वहाँ उनका अंतिम असाइनमेंट उसकी होम फ़ाइनेंस सहायक कंपनी के सीईओ का था. फ़ुलरटन से पहले वे स्टेंडर्ड चार्टर्ड बैंक के वसूली एवं धोखाधड़ी जोख़िम प्रबंधन विभाग के दक्षिण एशिया प्रमुख थे. वे पाँच वर्षों तक एचडीएफ़सी बैंक के खुदरा वसूली के प्रमुख भी रह चुके हैं. अपने करियर के आरंभ में वे एबीएन एमरो बैंक और बैंक ऑफ़ अमेरिका में क्षेत्रीय भूमिकाएँ निभा चुके हैं. इस समय वे रिलाइंस एसेट रीकंस्ट्रक्शन लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और सीईओ हैं.

 

सुश्री दीना मेहतास्वतंत्र निदेशक हैं तथा लेखापरीक्षा समिति, मनोनयन एवं पारितोषिक समिति, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व समिति, जोख़िम प्रबंधन समिति, और हितधारक संबंध समिति की सदस्य हैं. उन्हें पहली बार 11 मार्च 2016 को निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था. वह चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की सहयोगी सदस्य हैं और लंदन के प्रतिभूति एवं निवेश संस्थान की फेलो हैं. उन्होंने एनएमआईएमएस से वित्त में विशेषज्ञता और सरकारी लॉ कॉलेज से प्रतिभूति कानून में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स के साथ प्रबंधन अध्ययन में स्नातकोत्तर पूरा किया है. वर्तमान में, वह असित सी. मेहता इंवेस्टमेंट इंटरमीडिएट्स लिमिटेड की प्रबंध निदे​शिका हैं. सिक्योरिटीज़ के क्षेत्र में उनका 20 साल से अधिक का अनुभव है.

 

श्री धनंजय तिवारीकार्यकारी निदेशक हैं और उनके पास जोख़िम निगरानी एवं नियंत्रण, अंडरराइटिंग, नवीन उत्पाद विकास, क्रेडिट और वित्तीय अनुपालन के क्षेत्र में 25 वर्षों से भी अधिक का विविधतापूर्ण अनुभव है. इस समय वे रिलाइंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएल) के मुख्य क्रेडिट जोख़िम अधिकारी हैं. आरसीएल से जुड़ने से पहले वे विस्तार फ़ाइनेंशियल सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड में मुख्य जोख़िम अधिकारी थे. श्री धनंजय ने एचडीएफ़सी बैंक में अंडरराइटिंग संभाग के प्रमुख के रूप में 14 वर्षों तक सेवाएँ दी हैं. एचडीएफ़सी बैंक से जुड़ने से पहले श्री धनंजय कोटक, फ़ोर्ड क्रेडिट और जीएलएफ़एल में व्यापारिक भूमिकाएँ संभालते थे. वे प्रचालन में अधिक दक्षता, उत्पादकता और लागतों में बचत हासिल करने के उद्देश्य से प्रक्रिया में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग के प्रबल पक्षधर रहे हैं. श्री धनंजय के पास बड़ौदा की द महाराजा सैयाजीराव यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग तथा मास्टर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन की उपाधियाँ हैं.

 

मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक (केएमपीएस)

सुश्री एकता ठकुरेल कंपनी सचिव और अनुपालना अधिकारी, दि इंस्टीट्‌यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया के सहायक सदस्य हैं. उनके पास वित्तीय क्षेत्र में नौ साल का अनुभव है और उन्होंने कंपनी लॉ, कॉरपोरेट गवर्नेंस, आरबीआई और आईआरडीए कंप्लायंस के क्षेत्र में कोटक, एचडीएफसी और अन्य उल्लेखनीय समूहों के साथ काम किया है.

 

श्री संदीप खोसला 38 वर्ष, मुख्य वित्तीय अधिकारी, दि इंस्टीट्‌यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटैंट्‌स ऑफ इंडिया के एक सदस्य हैं. उनको वित्तीय क्षेत्र में लगभग पन्द्रह वर्षों का अनुभव प्राप्त है और रिलायंस ग्रुप में आने से पहले बजाज फाइनेंस, टाटा कैपिटल और आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड में वरिष्ठ प्रबंधन में शामिल रहे हैं.