ताजा अपडेट के लिए सब्सक्राइब करें

Text to Identify Refresh CAPTCHA कैप्चा रीफ्रेश करें

*साइन-अप करके मैं रिलायंस मनी से ई-मेल प्राप्त करने के लिए सहमत हूं

पीतल पार्ट्स विनिर्माण क्लस्टर, जामनगर के लिए बदलाव की एक कहानी

डॉ एस पाल एवं आर भट्टाचार्य

गुजरात के जामनगर जिले का पीतल के पुर्जों का क्लस्टर एक प्राकृतिक क्लस्टर है जिसकी स्थापना लगभग 70 वर्ष पहले हुई थी, और इसमें लगभग 5,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) हैं जो 2.5 लाख लोगों को रोज़गार देते हैं और इस क्लस्टर का वार्षिक टर्नओवर रु 3,500 - 4,500 करोड़ है। अपनी सात दशकों की मौजूदगी में, जामनगर ब्रास क्लस्टर (जेबीसी) ने क्लस्टर जीवन चक्र की अपनी यात्रा में चढ़ाव से ज्यादा उतार देखे हैं; वर्ष 1955 में इसके विकास ने तेज गति पकड़ी थी, जब तांबा व जस्ता उद्योग को आयात लाइसेंस जारी किए जाने में कोई कोताही नहीं बरती गई, और स्थानीय तकनीशियन सहयोगी मशीनरी और टूलिंग उद्योग की मदद से पीतल के किसी भी पुर्जे को बड़ी तेजी से ‘रिवर्स इंजीनियर’ कर डालते थे। वर्ष 1960 - 70 के दौरान, क्लस्टर का तेजी से विस्तार हुआ और यहां विद्युत उपकरणों के पुर्जे, साइकिल ट्यूब के वॉल्व, सेनिटरी फ़िटिंग, और ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिकल्स उद्योग में इस्तेमाल होने वाले अन्य सटीक पुर्जे बनाए जाने लगे। क्लस्टर ने घरेलू बाजार के लगभग 97 प्रतिशत हिस्से पर एकाधिकार कर लिया और अपनी लागत किफ़ायती उत्पादन लाइन तथा लघु स्तर की ‘लचीली विशेषज्ञता’ के साथ आयात बाजार की जगह तेजी से हथिया ली। हालांकि, 20वीं शताब्दी के अंतिम चौथाई भाग में वृद्धि दर तेजी से घट गई

क्लस्टर विकास का विज़न ‘प्रौद्योगिकी के उन्नयन, मार्केटिंग और नेटवर्किंग के साथ निर्यात-नीत वृद्धि’ का था। विज़न को (i) प्रौद्योगिकी के उन्नयन, (ii) बाजार के विकास, (iii) निर्यात गठबंधनों को सुगम बनाने के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि, (iv) बीडीएस बाजार का विकास करने, (v) संस्थागत लिंकेज को मजबूत बनाने तथा क्लस्टर कर्ताओं का क्षमता वर्धन करने के जरिए साकार किया जाना था। क्लस्टर विकास के कार्यान्वयन के लिए, सूक्ष्मआर्थिक उपक्रम-स्तरीय चिंताओं और क्लस्टर स्तरीय चिंताओं, दोनों को सहक्रियात्मक ढंग से लक्षित किया गया ताकि समग्र विकास सुनिश्चित हो। सर्वोत्तम कार्यप्रथाओं के दस्तावेज़ीकरण के जरिए ज्ञान एवं सूचनाओं के प्रसार में सहयोग, गुणवत्ता संबंधी किसी दिक्कत को न्यूनतम करने की दिशा में किए गए नवोन्मेषों के प्रदर्शन और अन्य सफल अंतरराष्ट्रीय पीतल क्लस्टरों (जैसे चीन में युहुआन) के संपर्क दौरे, इन सभी ने मिलकर क्लस्टर विकास कार्यक्रमों के जरिए स्थापित प्रक्रियाओं के विकास के चहुंदिशी प्रसार और अंततः उनके टिके रहने का मार्ग तैयार कर दिया। एक व्यापक निरूपण नीचे दिया गया है

  • विश्वास एवं नेटवर्क

2000 के दशक की शुरूआत में क्लस्टर की साझा आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करने के मामले में क्लस्टर कर्ता सामान्यतः अपने प्रयासों में सामूहिक नहीं थे। क्लस्टर के अंदर के नेटवर्क भी बेहद खंडित थे, और सूचना साझा करने की प्रथा थी ही नहीं। वर्ष 2005 के आस-पास क्लस्टर विकास कार्यक्रम के दौरान, एमएसएमई और बीडीएस के व्यवहार में बुनियादी बदलाव आया। जब और कार्यशालाएं, संगोष्ठियां, बीएमओ कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे तो धीरे-धीरे और अधिक लोग अपनी आम समस्याओं के बारे में समझने के लिए आने लगे, और उन्होंने साथ मिलकर अपने सामने आने वाली समस्याओं को सामने रखना शुरू कर दिया। यह सामूहिक मोलभाव, क्लस्टर में बीएमओ के मजबूत होने के रूप में साकार हुआ। पिछले कुछ समय में, क्लस्टर स्तरीय एसएमई ने कॉमन एफ़्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी, साझा दूषित-जल शोधन संयंत्र), टेक्नोलॉजी डेमॉन्सट्रेशन कम ट्रेनिंग सेंटर (टीडीटीसी, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केंद्र), और ऐसी अन्य ‘सार्वजनिक वस्तुओं’ जो क्लस्टर में ईडीआईआई की संलग्नता से पहले अप्रत्याशित थीं, की स्थापना के लिए सहायता-संघ बनाए हैं, पर दीर्घकालिक तथा कठोर हस्तक्षेपों के टिकाऊ होने के लिए, उचित सहयोग चाहिए जो क्लस्टर के लिए लाभकारी है

  • गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता
  • क्रोडन (कोरिंग) और पृथक्करण (सेग्रिगेशन)

क्रोडन और पृथक्करण जामनगर की फ़ाउंड्रियों के लिए हमेशा से मौजूद समस्या हैं। पिघली हुई धातु को सांचे में उड़ेलते समय ऊष्मा के असमान वितरण के कारण, कास्टिंग में श्वेत चित्तियां विकसित हो जाती हैं जिन्हें स्थानीय स्तर पर ‘कलर’ कहा जाता है। इस समस्या के कारण कास्ट घटक के 30% को रीसाइकिल करना पड़ता था। गुणवत्ता नियंत्रण निदर्शन पहले प्रतिशत त्रुटि पर आधारित था पर अब वह प्रति दस लाख पुर्जों में दोषों की संख्या, सिक्स सिग्मा और अन्य गुणवत्ता नियंत्रण निदर्शनों पर आ गया था; इससे क्लस्टर की उत्पादकता बुरी तरह बिगड़ गई, क्योंकि ऑर्डर ऐसे देशों को जाने लगे जहां टेक्नोलॉजी का आधार बेहतर था

  • क्लस्टर में प्रस्तुत किया गया टेक्नोलॉजी नवोन्मेष और उसके लाभ.

 

SNo.

टेक्नोलॉजी का विवरण

परिणामी लाभ

  1.  

कास्ट पीतल का समांगीकरण

क्रोडन और पृथक्करण को न्यूनतम करना और
ऐसा करके ऑटो वॉल्वों का रिसाव रोकना

  1.  

फ़ोर्जिंग डाइयों की निर्माण सामग्री में बदलाव

डाई के जीवनकाल में वृद्धि और बेहतर उत्पादकता

  1.  

बैरलिंग टेक्नोलॉजी के प्रक्रिया पैरामीटर में सुधार

प्रक्रिया समय न्यूनतम हुआ और इससे
उत्पादकता बढ़ी

  1.  

प्रक्रिया डाई की डिजाइन में बदलाव

बेहतर उत्पादकता

  1.  

पीतल के पुर्जों की मशीनिंग में उपयुक्त कटिंग ऑइल का उपयोग.

दाग-धब्बे न्यूनतम हुए जिससे अस्वीकरण घटा
(अस्वीकरण में 7% की कमी हुई है)

 

  • बाजार और मार्केटिंग

पीतल के पुर्जों के घरेलू बाजार में जेबीसी परंपरागत रूप से अग्रणी था। हालांकि, टेक्नोलॉजी का आधुनिकीकरण हो जाने, और व्यापार प्रतिबंधों में ढील मिलने से वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ स्थानीय बाजारों का जुड़ाव हो जाने के कारण, क्लस्टर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, क्योंकि दशक-दर-दशक निर्यात घटते गए। हालांकि, नई क्रेता-विक्रेता मुलाकातों, अग्रसक्रिय बीएमओ, और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से हुए संपर्क के फलस्वरूप एक ईकोसिस्टम का निर्माण हुआ जिसने क्लस्टर आधारित एमएसएमई और विदेशी आयातकों के बीच और भी बड़े आपसी सहयोग को सुगम बनाया। समुद्री हार्डवेयर और बेरीलियम कॉपर के उत्पादन में नवोन्मेष प्रस्तुत किए जाने और क्लस्टर एमएसएमई द्वारा उन्हें अपना लिए जाने पर नए बाजारों की पहचान हुई है

  • खराब बीडीएस बाजार  

क्लस्टर का बीडीएस बाजार का विकास खराब ढंग से हुआ है, जो अपने-आप में खुद एक क्लस्टर हो सकता है। दुनियाभर के अधिकांश उच्च विकसित क्लस्टर अपने समृद्ध बीडीएस बाजार पर गर्व करते हैं, जो सर्वाधिक उपयुक्त ढंग से उनसे जुड़ा होता है और जिसमें सूचना का चहुंओर प्रसार तीव्र गति से होता है तथा टेक्नोलॉजी को उपयोग में लेने की पहल तेजी से की जाती है। ईडीआईआई ने बीडीएस बाजार के विकास के लिए ट्रिपिल सी पद्धति पेश की - कस्टमर ओरिएंटेड (ग्राहक अभिमुख), कलेक्टिव (सामूहिक) और क्यूमुलेटिव (संचयी)। नई टेक्नोलॉजी के बीडीएस प्रदाता (सर्वश्री सैंडविक एशिया, सर्वश्री टाएगुटेक) को क्लस्टर से जोड़ दिया गया है। बढ़ती हुई वैश्विक प्रतिस्पर्धा में क्लस्टर जीवित रह पाए इस उद्देश्य के लिए क्लस्टर में बीडीएस बाजार का विकास करने में, विशेष रूप से मार्केटिंग, टेक्नोलॉजी, प्रशिक्षण और उत्पाद डिजाइन जैसी सेवाओं के क्षेत्र में, संयुक्त व ठोस प्रयासों की महती आवश्यकता है; जामनगर ब्रास क्लस्टर में गैर-वित्तीय फासलों पर किए गए सिडबी-केएफ़डब्ल्यू अध्ययन में भी यही आवश्यकता ज्ञात हुई है