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Medical Device Industry

डी एल पांड्या

एडिटर एंड सीईओ

मेडिकल प्लास्टिक्स डेटा सर्विस

अगर भारतीय चिकित्सा प्रणाली को आत्मनिर्भर बनना है, तो मेक—इन—इंडिया को 60,000 करोड़ रुपए के भारतीय चिकित्सा उपकरण उद्योग में गहराई तक जाने की आवश्यकता है। दिलचस्प बात यह है कि विश्वभर में प्रयोग हो रहे 20,000 चिकित्सकीय उत्पादों और अलग—अलग प्रकार के 5,00,000 से अधिक चिकित्सकीय उपकरणों के साथ इसकी रेंज बहुत विस्तृत है। हालांकि, आयात पर असंतुलित निर्भरता और स्वदेशी निर्माण का अधिकतर प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखला के निचले स्तर के उत्पादों तक सीमित होने के साथ, भारत का चिकित्सा उपकरण उद्योग बहुत छोटा है, वैश्विक उत्पादन के 1.5 प्रतिशत से भी कम। आश्चर्यजनक है कि आयात पर इतनी अधिक निर्भरता के कारण, वे एक औसत उपचार लागत में लगभग 25 प्रतिशत का योगदान देते हैं। जबकि भारत में चिकित्सा उपकरणों पर प्रति व्यक्ति खर्च बीआरईसी (BRIC) देशों के बीच सबसे कम है, यह एक काफी बड़े विकास के अवसर का प्रतिनिधित्व करता है, अनुमानों के अनुसार, 15 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए 2020 तक यह 860 करोड़ यूएस डॉलर का हो जाएगा

 

इस प्रकार, न केवल तकनीक के अंतर को कम करने के लिए बल्कि बीमारी के उपचार की लागत को कम करने के लिए भी मेक इन इंडिया की पहल सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन इसमें चुनौतियां हैं। तीन मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं — कच्चे माल की अनुपलब्धता, कुशल श्रमिकों की कमी और गुणवत्ता आवश्यकताओं को लागू करने की क्षमता

 

देश में पर्याप्त मानव पूंजी होने के बावजूद, यह उद्योग मात्रात्मक एवं गुणात्मक दोनों संबंधों में उपलब्ध कुशल एवं प्रशिक्षित जनशक्ति के अभाव की समस्या का सामना करता है। बीसीजी—सीआईआई श्वेत पत्र (2015) ने नवीनतम नियामक आवश्यकताओं एवं प्रवृत्तियों की बराबरी करने के लिए चिकित्सा प्रौद्योगिकी में कैरियर के अवसरों पर ध्यान केन्द्रित करने व बढ़ावा देने, चिकित्सकीय/संबंद्ध पाठ्यक्रम में चिकित्सा तकनीक के प्रति जागरूकता स्थापित करने और कार्यक्रमों की शुरूआत करने का सुझाव दिया है। लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योग (MSME) के स्तर पर चार मुद्दे सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। अल्पावधि में, (क) कुशलता बढ़ाने और उचित तकनीक तक पहुंच प्राप्त करने और (ख) उचित मूल्य पर महत्वपूर्ण कच्ची सामग्री पाने की आवश्यकता है, और मध्यम से दीर्घावधि में, (ग) नवाचार एवं पर्यावरण प्रणाली को बढ़ावा देने की आवश्यकता है

 

चिकित्सकीय प्रवृत्ति के मस्तिष्क के लिए कुशलता प्रदान करना: अब तक कर्मचारियों, विशेषकर अनौपचारिक/अनुबंधित श्रमिकों द्वारा किसी चिकित्सा उपकरणों को एक चिकित्सा उत्पाद के रूप में नहीं माना जाता है। वे अक्सर नौकरियां बदलते रहते हैं और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न तकनीकी आवश्यकताओं के बारे में नहीं जानते हैं। कर्मचारियों को ऐसी कुशलता प्रदान करने की तत्काल आवश्यकता है

 

संयोजन में विशेषज्ञता पर कुशलता प्रदान करना: इस व्यवसाय में कई लघु एवं छोटी इकाईयां मूलतः असेम्बल करती हैं। असेम्बल करने वाली इकाईयां दो विशेषज्ञ कुशकौशल पर निर्भर करती हैं — अंशांकन एवं परीक्षण। इन क्षेत्रों में उन्हें प्रशिक्षित तकनीशियनों एवं कर्मचारियों के सतत् प्रवाह की आवश्यकता है होती

 

असेम्बल करने के लिए मशीनरी का उपयोग: मोल्डिंग, एक्सट्रूजन और असेम्बल करने के लिए ज़रूरी उच्च तकनीक की मशीनरी की उपलब्धता अन्य देशों के समान नहीं है। इकाई मालिकों की कमी को देखते हुए, आज—कल के चलन वाले बड़े सामान्य सुविधा केन्द्रों (सीएफसी) के स्थान पर लघु सामान्य सुविधा केन्द्रों (सीएफसी) के निर्माण की आवश्यकता है

 

महत्वपूर्ण कच्चे माल का उपयोग: भारत में महत्वपूर्ण कच्चे माल की गुणवत्ता मानक के अनुकूल नहीं है। इसलिए बड़ी मात्रा में कच्चा माल आयात किया जाता है। हालांकि, तैयार उत्पाद की तुलना में इन कच्ची सामग्रियों पर आयात शुल्क इतना अधिक है कि भारत में असेम्बल करने की लागत अक्सर एक गैर-लाभकारी बन जाती है। इसलिए चिकित्सा उपकरणों के उत्पादों को तैयार करने में प्रयोग किए जाने वाले ऐसे कच्चे माल पर एक बहुत सस्ती दर पर शुल्क लगाने की आवश्यकता है

 

इनोवेशन को प्रोत्साहित करना: हमारे समाज में नौकरी पाने वाले की प्रशंसा की जाती है, लेकिन इनोवेटर को अनदेखा किया जाता है। इसके लिए एक स्थानीय कार्यबल बनाने की आवश्यकता है और उसके लिए इनोवेटर को प्रोत्साहित करने वाला एक वातावरण तैयार करने की भी आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, 2010 में पहली बार राष्ट्रीय जैव चिकित्सा अभियांत्रिकी सोसायटी (NBES) द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से अग्रणी इनोवेटर मैसर्स सहजानंद लेज़र को अभिनव नमूनों के लिए एक अखिल भारतीय पुरस्कार — "सहजानंद लेज़र प्रौद्योगिकी — सुश्रुता इनोवेशन अवार्ड" दिया गया था। यह पुरस्कार अब अपने संचालन के 5वें वर्ष में है (http://www.biomedsociety.com/)

 

अच्छे ग्राहकों के संपर्क में रहें: अक्सर इनोवेशन का प्रमुख स्रोत ग्राहक होते हैं जो कि विचार प्रदान करते हैं। लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों को नियमित आधार पर उनके संपर्क में रहने की आवश्यकता है अन्यथा इनोवेशन का प्रोत्साहित करने वाली अत्यावश्यक बुद्धिमत्ता हमेशा के लिए खो जाएगी

 

अनुच्छेद 4

वे अक्सर नौकरियां बदलते हैं और खाद्य एवं औषधि एडमिन के लिए बेहद जरूरी तकनीकी आवश्यकताओं के बारे में जागरूक नहीं होते

 

अनुच्छेद 5

चिकित्सा उपकरण असेम्बलिंग इकाईयों को भी निम्नलिखित दो विशेषज्ञ कौशल की आवश्यकता होती है — कैलीब्रेशन व टेस्टिंग

बेस्ट रेगार्ड्स,