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अपनी कंपनी के नकदी प्रवाह को बेहतर करने के 6 तरीके

उच्च लाभकारी बिजनेस और बड़ी टीम वाली कई बेहतर कंपनियों की संचालन पूंजी समाप्त हो चुकी है और वह अपना काम बंद कर चुकी हैं

एक बेहतर नकदी प्रवाह को बनाए रखना अधिकतर छोटे व मध्यम वर्ग के भारतीय उद्यमों (SME) के लिए भी एक चिंता का विषय रहा है। इस संभावित समस्या पर काबू पाने के लिए यहां 6 प्रभावी तरीके दिए गए हैं

 

लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) द्वारा बाजार विकास के विभिन्न तरीके:

अपने नकदी प्रवाह का प्रबंधन करने के लिए पहला कदम है अपने फाइनेंस का संपूर्ण अवलोकन करना। यह केवल तभी संभव है जब आपकी कंपनी अपने अकाउंटिंग का अच्छे से प्रबंधन करती हो। अधिकतर नियत लेखा सिद्धांतों एवं व्यवहार में चेकों और नकदी प्रवाह के लिए इनबिल्ट प्रणालियां होती हैं, इसलिए इन प्रक्रियाओं का अच्छे तरीके से पालन किया जाना चाहिए

आज, ऐसे विभिन्न लागत प्रभावी, क्लाउड—आधारित अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर हैं जो आपके बिजनेस के बारे में समय पर उचित (रियल—टाईम) जानकारी देते हैं। कुछ क्लिक से, आप कुल बकाया, बकाया भुगतानों, मुख्य देनदारों के बारे में पता कर सकते हैं, ऑटोमैटिक रिमाइंडर इत्यादि निर्धारित कर सकते हैं, और अन्य फीचर के बारे में जान सकते हैं जिससे आप अपने फाइनेंस का प्रबंधन ठीक तरह से कर सकते हैं

एक व्यावसायिक उद्यम होने के नाते, आप जानते हैं कि आपकी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान में चला जाता है। इन आपूर्तिकर्ताओं के साथ गहरे संबंधों का निर्माण करें ताकि आप सतत् गुणवत्ता एवं सुविधायुक्त भुगतान शर्तों के लिए आश्वस्त हो सकें। आपूर्तिकर्ताओं के साथ मज़बूत संबंध बनाना एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। इसके लिए आपको मजबूत संबंधों का निर्माण करने की आवश्यकता है

जस्ट-इन-टाईम (JIT) जैसी प्रणालियों के द्वारा माल सूची को सीमित करना न केवल दक्षता बढ़ाता है बल्कि नकदी प्रवाह में भी सुधार लाता है। पूर्व की जस्ट-इन-केस प्रणाली से पृथक, JIT मांग पूर्वानुमानों का पता लगाती है और आपको आवश्यकतानुसार ऑर्डर करने की अनुमति देती है

आप इनवेंटरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (ERP) का भी प्रयोग कर सकते हैं जो कच्चे माल के बारे में समय पर सही (रियल-टाईम) जानकारी प्रदान करते हैं और महत्वपूर्ण रि-ऑर्डर पॉइंटपर आपको ऑर्डर करने की अनुमति देते हैं

देरी से भुगतान प्रत्येक बिजनेस के लिए एक अभिशाप है। इसका मतलब यह है कि अधिकतर राजस्व लॉक हो जाता है। अंतर्राष्ट्रीय फाइनेंस प्राधिकरण (IFC) की हाल ही की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि लगभग 35% छोटे व मध्यम वर्ग के भारतीय उद्यमों (SME) को प्रोडक्ट डिलीवरी के तीन महीनों के बाद भुगतान प्राप्त होता है

यह SME (छोटे व मध्यम वर्ग के उद्यम) लोन डिफॉल्ट के प्रमुख कारणों में से एक है। इसलिए, भुगतान के लिए ग्राहकों से नियमित रूप से जानकारी लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कड़े अनुबंधों को प्रारंभ (और लागू) करें जो विलंबित भुगतानों के खिलाफ आपकी सुरक्षा करते हों

नकदी के अभाव के साथ, ऊपरी खर्चों को कम करना और भी आवश्यक हो जाता है। 'जितना प्रयोग उतना भुगतान' या मासिक सदस्यता आदर्श अपनाकर आप अपने फाइनेंस पर बोझ कम कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कंप्यूटरों को खरीदने की बजाय किराए पर लेना आपके पूंजी निवेश को कम करेगा। साझा सेवाओं (जैसे कि क्लाउड स्टोरेज) का प्रयोग, विशेषज्ञ कामों (जैसे भर्तियां) को बाहरी स्रोत को ठेके पर देना (आउटसोर्स करना), और नियमित निवारक रख—रखाव के लिए कदम उठाना ऊपरी खर्चों को कम करने के कुछ तरीके हैं

अपने बिजनेस को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की संभावना वाले अभिनव और हानिकारक विचारों के प्रति स्पष्ट सोच रखें। उदाहरण के लिए, आप बी2बी ई—कामर्स पोर्टलों के माध्यम से बिक्री—खरीद पर विचार कर सकते हैं. अध्ययनों से पता चलता है कि बी2बी ई—कॉमर्स का प्लेटफर्म माल सूची की लागत को 40% तक नीचे ला सकते हैं और छोटे व मध्यम वर्ग के उद्यमों (SME) को मोल—भाव करने की उच्च शक्ति, पर्याप्त पूंजी और भंडारण की घटी हुई लागतों के साथ मदद कर सकते हैं

 

अधिक जानकारी के लिए आज ही रिलायंस कमर्शियल फाईनेंस से संपर्क करें microfinance, and SME Finance.

  1. अपने फाइनेंस पर नियंत्रण रखें
  2. अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें

    माल सूची पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखने के लिए ऐसे संबंध काफी महत्वपूर्ण होते हैं.

    • अपने आपूर्तिकर्ताओं से नियमित रूप से बातचीत करें
    • उनकी बकाया राशियों का शीघ्र भुगतान करें
    • भुगतान में विलंब का पूर्वानुमान होने की स्थिति में संचार करें
    • त्वरित पूरे किए जाने वाले (रश) ऑर्डर से बचें (जहां तक संभव हो)
    • मुद्दों के उत्पन्न होते ही उन पर तुरंत ध्यान दें
  3. माल सूची को सीमित करें
  4. भुगतान के लिए ग्राहकों से नियमित रूप से जानकारी लें
  5. ऊपरी खर्चों को कम करें
  6. नए परिवर्तन करने के लिए तैयार रहें