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एसएमई लोन लेते समय 5 सामान्य गलतियां, जिनसे बचना चाहिए

छोटे और मझोले उद्यम (एसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जहां उनके उत्पाद और सेवाएं, उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य हैं, वहीं एसएमई अनेक चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं, और वित्तपोषण की व्यवस्था उनमें से एक है। वर्तमान कारोबारी माहौल में, एसएमई के लिए अपनी क्षमताओं और पहुंच का विस्तार करने के लिए लोन महत्त्वपूर्ण हैं

वित्तपोषण पाने के लिए, एसएमई को ऋणदाता के पात्रता दिशानिर्देशों का पालन करना होता है और एक सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। चूंकि बाज़ार अत्यन्त प्रतिस्पर्धी है और संसाधन सीमित होते हैं इसलिए छोटे उद्यमियों के लिए एसएमई लोन द्वारा अपने व्यापार का वित्तपोषण कराने हेतु कुछ निश्चित गलतियों से बचाव करना और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है

 

उपयुक्त कारोबारी योजना न होना

लंबे समय की ठोस योजना का अभाव, छोटे उद्यमियों की एक कमी है। अनेक एसएमई मालिक इसका पूर्वानुमान नहीं कर पाते कि वे प्राप्त निधियों का अपने व्यवसाय की वृद्धि और विस्तार हेतु किस तरह प्रयोग करेंगे, और अचानक उनका नकदी-प्रवाह अपर्याप्त हो जाता है-उनको अपनी कार्यशील पूंजी की ज़रूरतें पूरी करने में कठिनाई उत्पन्न होने लगती है

इसलिए, किसी बिजनेस मॉडल के लिए पहले से एक सुनियोजित, दीर्घकालीन योजना होना आवश्यक है। इसे व्यावहारिक होना चाहिए तथा सभी सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय कारकों को ध्यान में रखकर बनाया गया होना चाहिए। एक सम्पूर्ण बिजनेस प्लॉन ऋणदाता को उनके निवेश की सुरक्षा, तथा ऋणकर्ता की गंभीरता के बारे में आश्वस्त करता है

 

आवश्यक धनराशियों को लेकर निश्चितता का अभाव

स्पष्ट विचार न होने पर अधिकांश व्यवसाय मालिक अपनी पूंजी आवश्यकताओं को कम करके आंक सकते हैं और इससे महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं हेतु वित्तपोषण आवश्यकता से कम हो सकता है। दूसरी ओर, ऋण राशि का बढ़ाकर आकलन करने से आपको अनावश्यक कर्ज और ज्यादा ब्याज का भार उठाना पड़ता है जिसका नतीजा निष्क्रिय निधियों के साथ बड़ी ईएमआई के रूप में सामने आता है

 

व्यवसाय के बारे में अपर्याप्त वित्तीय डाटा

बिजनेस लोन (व्यावसायिक ऋण) लेते समय महत्त्वपूर्ण वित्तीय डाटा प्रस्तुत करना और आपके व्यवसाय के कार्यप्रदर्शन का आकलन करना अनिवार्य है। बैलेंस शीट निर्धारित करने के लिए आपके पास कारोबारी विस्तार, तथा उत्पन्न मुनाफे के बारे में ठोस जानकारी होनी चाहिए

इससे न केवल आवश्यक निधियों के गलत अनुमान लगाने की संभावना समाप्त होती है, बल्कि दोनों पक्षों को निवेश की व्यावहारिकता और परिणामों का आकलन करने में भी मदद मिलती है

 

वित्त के असंगत स्रोत का चयन

वित्त के स्रोत से जुड़ी शर्तें, आपके व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। लोन से जुड़े छिपे प्रभारों जैसे कि प्रोसेसिंग शुल्क, समय-पूर्व भुगतान दंडराशि आदि पर विचार करके वित्तपोषण की वास्तविक लागत समझें। इससे आपके व्यवसाय के आवश्यकता से अधिक या कम वित्तपोषण से बचाव हेतु वित्त का उपयुक्त स्रोत चुनने में मदद मिलेगी

 

पारंपरिक ऋणदाताओं पर अधिक निर्भरता

बाज़ार में उपलब्ध वित्तीय विकल्पों जैसे कि बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं (एनबीएफसी), इक्विटी वित्तपोषण और सरकारी योजनाओं आदि का गहराई से विश्लेषण करके आपको अपने व्यवसाय के वित्तपोषण हेतु सर्वोत्तम विकल्प चुनने में मदद मिल सकती है। बैंकों में प्रायः ज्यादा ब्याज दरों के साथ ऋण देने संबंधी मानक अधिक कड़े होते हैं। एनबीएफसी पर विचार करें क्योंकि वे आधुनिक व्यवसाय की बदलती ज़रूरतों के अनुरूप ज्यादा लचीलापन और कम ब्याज दरें प्रस्तावित करते हैं

युवा उद्यमियों को उनके व्यवसाय की वृद्धि और विस्तार में मदद के लिएरिलायंस मनी एसएमई को किफायती दरों पर व्यावसायिक विस्तार ऋण प्रदान करता है