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एमएसएमई द्वारा बाजार के विकास के लिए 10 तरीके

"बिजनेस के केवल दो कार्य हैं — मार्केटिंग एवं नवाचार..... मिलन कुंदरा"

मार्केटिंग किसी कंपनी और उपभोक्ता के बीच संचार का वर्णन करने के लिए व्यापक रूप से प्रयोग किया जाने वाला वह शब्द है जिसका उद्देश्य लोकमानस में कंपनी या उसके माल के मूल्य को बढ़ाना या, सामान्य रूप से, कंपनी की रूपरेखा और उसके प्रोडक्ट में वृद्धि करना होता है।
मार्केटिंग बिजनेस के विकास के लिए एक सामरिक उपकरण है और यह लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) की वृद्धि और अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। मार्केटिंग किसी भी उद्यम की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक है। यह उन सबसे कमजोर क्षेत्रों में से एक है जहां वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में MSME प्रमुख समस्याओं का सामना करते हैं। जानकारी के अभाव, संसाधनों की कमी और बिक्री / मार्केटिंग के अनियोजित तरीके के कारण, MSME को नए बाजारों का लाभ उठाने में समस्याएं आती हैं। बिजनेस में बने रहने के लिए, MSME के लिए मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखना और नए बाजारों की पहचान करना महत्वपूर्ण है। इसलिए, MSME के लिए विकासशील बाजारों के लिए उपलब्ध अलग—अलग तरीकों और सहयोग के बारे में जानकारी रखना महत्वपूर्ण है

लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) द्वारा बाजार विकास के विभिन्न तरीके

  • • जिला उद्योग केन्द्र, MSME—डीआई और अन्य सरकारी संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शनियों में भागीदारी: इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए मार्केटिंग सहयोग और तकनीकी उन्नयन के लिए एक स्कीम है जो राज्य/जिला प्राधिकरणों/संघों द्वारा आयोजित की जाने वाली राज्य/जिला स्तर की प्रदर्शनियों में लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) को सहभागिता के माध्यम से उनके निर्माण के लिए मार्केटिंग प्लेटफॉर्म प्रदान करती है. इसमें सरकार और MSME के क्रमश: 80:20 के अनुपात में अधिकतम 3 लाख रुपए का प्रावधान है और महिला उद्यमियों के लिए अलग से विशेष प्रावधान है.
  • बी2बी मीटिंग में भागीदारी: इसमें लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) के बीच बी2बी बैठकों में भागीदारी, MSME प्रोडक्ट के लिए निर्यात अवसरों की खोज और नए ग्राहकों को आकर्षित करना एवं MSME की मार्केटिंग पहुंच को बढ़ाना शामिल है. इसमें MSME में मार्केटिंग सहयोग और तकनीकी उन्नयन स्कीम के तहत समर्थन भी शामिल है. अधिक जानकारी इस पर उपलब्ध है http://msme.gov.in/WriteReadData/DocumentFile/MarkAssis.pdf
  • विक्रेता विकास कार्यक्रमों (VDP) में भागीदारी: यह बिजनेस के साथ—साथ विक्रय संगठनों के लिए खरीदार संगठनों की उभरती मांगों की पहचान करने, साथ—ही—साथ छोटे वर्ग के उद्यमियों और उनके औद्योगिक उपक्रमों की क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए एक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से एक—दूसरे के साथ बातचीत करने के लिए एक सार्वजनिक प्लेटफॉर्म है. VDP अलग—अलग शहरों में स्थित MSME—DI द्वारा आयोजित किया जाता है. DI द्वारा दो प्रकार के VDP का आयोजन किया जा रहा है — राष्ट्रीय स्तर की VDP—कम—प्रदर्शनियां और राज्य स्तर के VDP. अधिक जानकारी इस पर उपलब्ध है http://msme.gov.in/WriteReadData/DocumentFile/Vendor_Development_Programme_Ancillarisation.pdf
  • अंतर्राष्ट्रीय मेलों/प्रदर्शनियों में भागीदारी: विदेशी बाजारों को दुरूस्त करने एवं उनका विकास करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, DC—MSME की MSME—MDA स्कीम को धन के समर्थन का एक प्रावधान है. यह स्कीम ईकोनॉमी श्रेणी के हवाई किराए के 75% की और सामान्य वर्ग में लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) के लिए जमीनी किराया शुल्कों के 50% की प्रतिपूर्ति करेगी और इसमें महिलाओं/एससी/एसटी उद्यमियों और उत्तर—पूर्वी क्षेत्र के उद्यमियों के लिए जगह के किराए और ईकोनॉमी श्रेणी के हवाई किराए की 100% प्रतिपूर्ति का एक विशेष प्रावधान भी है. अधिक जानकारी इस पर उपलब्ध है http://dcmsme.gov.in/MSME-DO/SSIMDA.htm
 

अंतर्राष्ट्रीय मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योग (MSME) मंत्रालय की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग स्कीम के अंतर्गत सहायता भी प्रदान की जाती है। अधिक जानकारी इस पर उपलब्ध हैhttp://msme.gov.in/WriteReadData/KMS/International_Cooperation_Section_37.pdf

  • भारत में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मेलों/प्रदर्शनियों में भागीदारी: इसमें भारतीय बिजनेस प्रचार संगठन (ITPO) द्वारा आयोजित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय बिजनेस मेले (IITF) जैसे कार्यक्रमों या भारत में आयोजित ऐसे अन्य प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों/बिजनेस मेलों में भारतीय लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) की भागीदारी शामिल है. MSME मंत्रालय की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग स्कीम के अंतर्गत सहयोग प्रदान किया जाता है. अधिक जानकारी इस पर उपलब्ध है
  • ऑनलाइन मार्केटिंग: इस सेक्शन का ध्यान आधुनिक मार्केटिंग तकनीकों पर संघ/प्रोडक्ट समूह के सदस्यों के कौशल के विकास के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने पर केन्द्रित होगा. विशेषज्ञ संस्थानों से योग्य प्राध्यापकों की सेवाओं का उपयोग करने द्वारा विशेष संस्थानों/उद्योग संघों द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार एवं आयोजित किए जाएंगे. यह कार्यक्रम दो दिनों की अवधि के लिए तैयार किए जाएंगे. प्रत्येक समूह में कम से कम 20 व्यक्तियों का प्रशिक्षण जरूरी होगा.
  • एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भागीदारी: लघु, छोटे एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों (MSME) को मार्केटिंग प्लेटफॉर्म प्रदान करने के लिए, कई औद्योगिक संघ वार्षिक खरीददार—विक्रेता बैठकों का आयोजन करते हैं. उदाहरण के लिए, ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित प्लास्टीविजन, द कोयम्बटूर डिस्ट्रिीक्ट स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा आयोजित एग्रीइंटेक्स, आदि.
  • BDSP की नियुक्ति करना: ऐसे कई सलाहकार और विशेषज्ञ हैं जिनके पास मार्केटिंग का विशाल अनुभव है. MSME की मार्केटिंग स्कीम जैसे कि वेबसाइट निर्माण, मेलों एवं प्रदर्शनियों में भागीदारी, आदि पर मार्गदर्शन प्राप्त करने और मजबूत समर्थन के लिए औद्योगिक एसोसिएशन के माध्यम से MSME द्वारा ऐसे विशेषज्ञों को व्यक्तिगत या संयुक्त रूप से नियुक्त किया जा सकता है.